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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 132

१२२ गरीबदास जी की बानी
चित्रगुप्त१ के कागज चीरौं । जुगन जुगन मेटौं तसकीरौं ॥
अदली ज्ञान अदल इक रासा२ । सुन कर हंसन३ पावैं त्रासा ॥
इजराईल४ जुसा बरदाना। धरमराय का है तलबाना ॥
मेटौं तलब करौं तागीरा५ । भेंटे दास गरीब कबीरा ॥
( ६ )
अदली आरत अदल पठाऊँ । जुगन जुगन का लेखा पाऊँ॥टेक
जा दिन नहिं थे पिंड न प्राना । पानी पवन जिमीं असमान॥
कच्छ मच्छ कूरम नहिं काया । चंद सूर नहिं दीप बनाया ॥
सेस महेस गनेस न ब्रह्मा । नारद सारद ना बिसकर्मा ॥
सिध चोरासी ना तेंतीसौ । नौ औतार नहीं चौबीसौ ॥
पाँच तत्त नाहीं गुन तीना । नाद बिंद नाहीं घट सीना ॥
चित्रगुप्त६ नहिं किर्तुम बाजी । धरमराय नहिं पंडित काजी ॥
धुँधूकार अनंत जुग बीते । जा दिन कागद कोउ के चीते७ ॥
जा दिन थे हम तखत खवासा । तन के पाजी सेवक दासा ॥
संख जुगन परलूँ परवाना । सत्तपुरुष के संग रहाना ॥
दास गरीब कबीर का चेरा । सत्तलोक अमरापुर डेरा ॥
( ७ )
ऐसी आरत अपरम्पारा । थाके ब्रह्मा बेद उचारा ॥टेक
अनंत कोट जाके संभू ध्यानी । ब्रह्मा संख बेद पढ़ैं बानी ॥
इंद्र अनंत मेघ रस माला । सब्द अतीत वृद्ध नहिं बाला ॥
चंद सूर जाके अनंत चिरागा । सब्द अतीत अजब रँग बागा॥
सात समुद्र जाके अंजन नैना । सब्द अतीत अजब रँग बैना ॥
अनंत कोट जाके बाजे बाजैं । पूरन ब्रह्म अमरपुर छाजैं ॥
तीस कोट रामा औतारी । सीता संग रहंती नारी ॥
(१) जमपुरी में कर्मों का लेखा रखने वाला देवता । (२) एक रस । (३) जीव ।
(४) जान निकालने वाले फ़िरिश्ते का नाम । (५) तंगो । (६) कर्मों का लेखा रखने वाले
देवता । (७) तब तक कर्मों का हिसाब किसी का नहीं खुला था ।