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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

पृष्ठ 130, कुल 186 में से

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पृष्ठ 130

१२० गरीबदास जी की बानी
कैसे ब्राह्मन कैसे सूद्रं । एकै हाड़ चाम तन गूदं ॥ २ ॥
एकै बिंद एक भग द्वारा । एकै सब घट बोलनहारा ॥ ३ ॥
कौम छत्तीस एकही जाती । ब्रह्म बीज सबकी उतपाती ॥ ४ ॥
एकै कुल एकै परिवारा । ब्रह्म बीज का सकल पसारा ॥ ५ ॥
ऊँच नीच इस बिध है लोई । कमे कुकर्म कहावै दोई ॥ ६ ॥
गरीबदास जिन नाम पिछाना । ऊँच नीच पद ये परमाना ॥७॥
॥ आरती ॥
अदली आरत अदल समोई । निरभय पद में मिलना होई ॥टेक
दिल का दीप पवन की बाती । चित का चंदन पाँचो पाती ॥
तत का तिलक ध्यान की धोती । मन की माला अजपा जोती ॥
नूर के दीप नूर के चौरा । नूर के पुहुप नूर के भौंरा ॥
नूर की झाँझ नूर की झालर१ । नूर के संख नूर की टालर२ ॥
नूर की साँझी३ नूर की सेवा । नूर के सेवक नूर के देवा ॥
आदि पुरुष अदली अनुरागी । सुन संपुट में सेवा लागी ॥
खोजो कमल सुरति की डोरी । अगर दीप में खेलो होरी ॥
निरभय पद में निरत समानी । दासगरीब दरस दरबानी ॥
( २ )
अदली आरत अदल उजारा । सत्त पुरुष दीजो दीदारा ॥टेक
कैसे कर छूटै चौरासी । जूनी संकट बहुत तिरासी ॥
जुगन जुगन हम कहते आये । भवसागर से जीव छुटाये ॥
कर बिस्वास स्वास कूँ पेखो । या तन में मन मूरत देखो ॥
स्वासा पार सु भेद हमारा । जो खोजे सो उतरे पारा ॥
स्वासा पार सु आदि निसानी । जो खोजै सो होय दरबानी ॥
हर दम नाम सुहंगम सोई । आवा गमन बहुर ना होई ॥
(१) बिजय घंट । (२) ताल । (३) रंग या फूल पत्ती की चित्रकारी जो ठाकुरजी के
सामने बनाई जाती है ।