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सर्वकोश
गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 129

रमैनी ११६
( ३ )
बिनहीं पंथ पंथ है भाई । बिन चरनों चालै सो जाई ॥
बिनहीं देह धरै जहँ ध्याना। देह न गेह१ न पिंड न प्राना ॥
पिंड ब्रह्मांड बाक नहिं बानी । मन बुधि सेती अगम निसानी ॥
अलिफ इलाम२ गाम नहिं गेहा । गगन मँडल में जुरा सनेहा ॥
एता ईलम३ जो दिखलावै । सो सतगुरु साँचा कहलावै ॥
गरीबदास मन धरै न धीरं । अधर धार पंथ बाट कबीरं ॥६॥
( ४ )
रूप न रेख भेष नहिं बाना । आसन असल लना४ अस्थाना ॥
अकल अभूनी५ गम नहिं मोरी । हे सतगुरु कहँ पाऊँ डोरी ॥
ऊँचा धाम गाम नहि कोई । बिना चरन जहँ चलना होई ॥
अचरज लीला अगम अपारा । कैसे पाऊँ पंथ तुम्हारा ॥
सुरत निरत का सार सनेसा६ । उतरै हंसा पार हमेसा ॥
कहै कबीर पुरुष बरियामं७ । गरीबदास इक नौका नामं ॥
( ५ )
आदि सनातन पंथ हमारा । जानत नाहीं यह संसारा ॥
पंथों सेती पंथ अलहदा । भेखों बीच पड़ा है बहदा८ ॥
षट दरसन सब खटपट होई । हमरा पंथ न पावै कोई ॥
हिन्दू तुरक कदर नहिं जाने । रोजा ग्यारस करै धिक ता नेह९ ॥
दोनों दोन यकौ न आसा । वे पूरब वे पच्छिम निवासा ॥
दुहूँ दोन का छोड़ा लेखा । उत्तर दखिनन में हम देखा ॥
गरीबदास हम निःचै जाना । चारो खूँट दसो दिस ध्याना ॥
( ६ )
कैसे हिंदू तुरक कहाया । सबही एकै द्वारे आया ॥ १ ॥
(१) घर । (२) अल्लाह में अलिफ और लाम दो हर्फ़ हैं—अलाम के अर्थ सर्वज्ञ
के भी हैं । (३) विद्या । (४) लामकान । (५) तुच्छ बुद्धि । (६) सँदेसा । (७) श्रेष्ठ ।
(८) बाद बिबाद । (६) मुसलमान रोजा रखते हैं और हिन्दू एकादशी का व्रत सो दोनों
को धिक्कार है।