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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 127

रमैनी ११७
अधर बँगला अधर डेवढ़ी, अधर साहब आप वे ।
अधर पुर गढ़ हूँठ नगरी, नाभि नासा माथ वे ॥ ५ ॥
हूँठ हाथ हजूर हासिल, अधर पर इक अधर वे ।
गरीबदासं अधर ध्यानी, ओढ़ि एकै चदर१ वे ॥ ६ ॥
( ७ )
बंदे पाक नाम पिछान वे ।
पाक मेला पाक परबी, पाक है असनान वे ॥ १ ॥
पाक सेवा पाक पूजा, पाक सालिग्राम वे ।
पाक चंदन पाक अरचन, पाक है वह धाम वे ॥ २ ॥
पाक संखा पाक झालर२, पाक है वो तूर३ वे ।
पाक बीना पाक घंटा, पाक यारा नूर वे ॥ ३ ॥
पाक सिज्जा४ पाक आसन, पाक है वह तख्त वे ।
पाकै पुजारी पूजता, जो पाक है सब रख्त५ वे ॥ ४ ॥
पाक कुरसी पाक तुरसी६, पाक माला फेर वे ।
पाक रागी पाक गावै, पाक नादं भेर७ वे ॥ ५ ॥
पाक भौंरा पाक चौंरा, पाक पुस्पं गंध वे ।
पाक मोती पाक हंसा, पाक सरवर सिंध वे ॥ ६ ॥
पाक लहरा पाक मिहरा, पाक सूरज चंद वे ।
पाक सस्तर पाक बस्तर, पाक पुर आनंद वे ॥ ७ ॥
पाक बानी पाक प्रानी, पाक बोलनहार वे ।
गरीबदासं पाक होकर, पाक कर दीदार वे ॥ ८ ॥
॥ रमैनी ॥
जब लग हंसा हमरी आना। तब लग लगै न तुमरा८ बाना ॥
दोही दे गुरु भरैं हँकारा६। तिन हंसों की चढ़ँ पुकारा ॥
(१) चोला, शरीर । (२) झाँझ । (३) तुरही । (४) पलंग । (५) सामान ।
(६) तुलसी । (७) शहनाई । (८) धर्मराय से कह रहे हैं । (६) गुरू की दोहाई देकर
हाँक मारैं ।
१६