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गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)

Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad

सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished186 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

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( २ )
बिरह की पीर जिस मात गूदानहीं, बीझ पिंजर गया अस्थि सूखा¹
उनमुनी रेख² धुन ध्यान निःचल भया, पाँच जहूद³ तन ठोक फूँकूँ का
लगैगी दाह जब धाहै४ देता फिरै, बिरह के अंग में रोवता है ।
पलक आँसू५ भरै ध्यान बिरहन धरै, प्रेम रस रीत तन धोवता है॥
हाड़ तन चाम गूदा असत६ गलत है, उड़ेगा गात तन रुई रंगा७ ।
पिंड तन पीत८ उदीत९ बैराग है, देत है मद्ध ज्यूँ कूक१० बंगा¹¹ ॥
हंस परमहंस सरवंग से जा मिला, बिरह वियोग यह जोग जोगी ।
दास गरीब जहँ पास प्याले फिरैं, पीवते सही रस भोग भोगी ॥
( ३ )
दीद बर दीद परतीत परतच्छ है, नयन के नाद में गरक१२ होई ।
अजब गलतान कुरबान इक तन्त१३ है, सब्द अतीत कूँ परख लोई॥
जस पानी के बीच में बुदबुदा होत