गरीबदास जी की बानी (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर परम्परा एवं अमर ग्रन्थ)
Garibdas Ji Ki Bani: Belvedere Press Allahabad
सन्त गरीबदास जी छुड़ानी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
पृष्ठ 106, कुल 186 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ गरीबदास जी की बानी
( ६ )
जुलमी जुलमाना छाँड़ भइया, गल काटत है बदला लीजै ।
खिचड़ी खाना तज हलवाना,१ सुरापान२ पराधी३ क्युँ कीजै ॥१॥
रहै कोट बरस सँग साधों के, जल में पाहन का क्या भीजै ।
चंदन बन में रंग लावत है, इक बाँस बिटंबी४ ना सीझै ॥२॥
बहिरे आगे पद छंद कहा, समझै नहिं मूढ़ कहा रीझै ।
कहै दास गरीब कुटिल काजी, चल जवाब सरै५ में क्या दीजै॥३॥
( १० )
पापी परभात६ नहीं भेंटै, मुख देखत पाप लगै जा का ।
जननी नौ मास तिरास दई, धिरकार जनम तिसकी मा का ॥१
चौरासी कुंड पड़े पापी, है जगन जुगन कुंभी पाका ।
गर्भ छेदन बेधन पीर लगै, मिटता नाहीं इच्छा टाँका ॥२॥
जिस सेरी७ साधू संत गये, वह मारग कठिन बहुत बाँका ।
कहै दास गरीब धर बूझ भइया, भया तीन लोक सावँत साका८ ॥३
॥ रेखता ॥
( १ )
अजब महरम मिला ज्ञान अगहै६ खुला, परख परतीत सूँ दुंद भागा ।
सब्द की संध में फंद मनुवाँ गया, बिरह घनघोर में हंस जागा ॥१
अष्टदल कमल मध जाप अजपा चलै, मूल कूँ बंध बैराट छाया ।
तिरकुटी तीर बहु नीर नदियाँ बहैं, सिंध सरवर भरे हंस नहाया ॥२
खेचरी भूचरी चाचरी उनमुनी, अकल अगोचरी नाद हेरा ।
सुन्न सतलोक कूँ गमन हंसा किया, अगमपुर धाम महबूब मेरा ॥३
अच्छर की डोर घनघोर में मिल गई, भेद भेदा मैं करतार महली ।
दास गरीब यह बिषम१० बैराग है, समझ देखो नहीं बात सहली ११॥
(१) बकरी का बच्चा । (२) शराब खोरी । (३) अपराध । (४) गठीला । (५) शरा
यानी हजरत मुहम्मद की नसीहतों की किताब । (६) तड़के । (७) तङ्ग रास्ता । (८) किसी
शूर वीर की कीर्ति का नया सम्बत् । (६) दुर्लभ । (१०) कठिन । (११) सहज ।