गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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४ गणितसारसंग्रह
| शब्द | सामान्य अर्थ | संख्या अभिधान | उद्गम |
|---|---|---|---|
| चन्द्र | चन्द्रमा The moon | १ | इन्दु देखिए । |
| चन्द्रमस् | चन्द्रमा The moon | १ | इन्दु देखिए । |
| जलधर पथ | आकाश Sky | ० | अनन्त देखिए । |
| जलधि | महासागर Ocean | ४ | अब्धि देखिए । |
| जलनिधि | महासागर Ocean | ४ | अब्धि देखिए । |
| जिन | वह नाम जिसमें अरिहंत | २४ | जिन आगम के अनुसार भरत कर्मक्षेत्र में अवसर्पिणी काल |
| सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय | में २४ तीर्थंकर होते हैं; प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और | ||
| और सर्व साधुओं का | अंतिम तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर माने जाते हैं। | ||
| नाम गर्भित रहता है। | |||
| The name which | |||
| implies Arhat, | |||
| Siddhas, Achryas, | |||
| Upadhyayas & | |||
| all Saints. | |||
| ज्वलन | आग Fire | ३ | अग्नि देखिए । |
| तत्व | तत्व | ७ | जैन धर्म में सात तत्वों की मान्यता इस प्रकार है : जीव |
| Elementary Pri- | (चेतन), अजीव (अचेतन), आस्रव (कर्मों के आने | ||
| nciples. | के द्वार), बंध (कर्मों का आत्मा के साथ सम्बन्ध), | ||
| संवर (आस्रव का निरोध), निर्जरा (कर्मों का एक देश | |||
| नाश) और मोक्ष (आत्मा का पूर्ण रूप से कर्मों से छूटना)। | |||
| तनु | काय Body | ८ | शिव का तनु आठ वस्तुओं से बना हुआ माना जाता है : |
| पृथ्वी, अप्, तेजस्, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्र, यजमान । | |||
| तर्क | Evidence | ६ | तर्क के छः प्रकार हैं : प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, |
| अर्थापत्ति और अनुपलब्धि । | |||
| तार्क्ष्यध्वज | विष्णु Viṣṇu | ९ | उपेन्द्र देखिए । |
| तीर्थंक | Tirthankar or | २४ | जिन देखिए । |
| Jina. | |||
| दन्तिन् | हाथी An elephant | ८ | इभ देखिए । |
| दुरित | सांसारिक कर्म | ८ | कर्मन् देखिए । |
| Worldly action |