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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 339, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 339

४ गणितसारसंग्रह

शब्दसामान्य अर्थसंख्या अभिधानउद्गम
चन्द्रचन्द्रमा The moon१इन्दु देखिए ।
चन्द्रमस्चन्द्रमा The moon१इन्दु देखिए ।
जलधर पथआकाश Sky०अनन्त देखिए ।
जलधिमहासागर Ocean४अब्धि देखिए ।
जलनिधिमहासागर Ocean४अब्धि देखिए ।
जिनवह नाम जिसमें अरिहंत२४जिन आगम के अनुसार भरत कर्मक्षेत्र में अवसर्पिणी काल
सिद्ध, आचार्य, उपाध्यायमें २४ तीर्थंकर होते हैं; प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव और
और सर्व साधुओं काअंतिम तीर्थंकर वर्द्धमान महावीर माने जाते हैं।
नाम गर्भित रहता है।
The name which
implies Arhat,
Siddhas, Achryas,
Upadhyayas &
all Saints.
ज्वलनआग Fire३अग्नि देखिए ।
तत्वतत्व७जैन धर्म में सात तत्वों की मान्यता इस प्रकार है : जीव
Elementary Pri-(चेतन), अजीव (अचेतन), आस्रव (कर्मों के आने
nciples.के द्वार), बंध (कर्मों का आत्मा के साथ सम्बन्ध),
संवर (आस्रव का निरोध), निर्जरा (कर्मों का एक देश
नाश) और मोक्ष (आत्मा का पूर्ण रूप से कर्मों से छूटना)।
तनुकाय Body८शिव का तनु आठ वस्तुओं से बना हुआ माना जाता है :
पृथ्वी, अप्, तेजस्, वायु, आकाश, सूर्य, चन्द्र, यजमान ।
तर्कEvidence६तर्क के छः प्रकार हैं : प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द,
अर्थापत्ति और अनुपलब्धि ।
तार्क्ष्यध्वजविष्णु Viṣṇu९उपेन्द्र देखिए ।
तीर्थंकTirthankar or२४जिन देखिए ।
Jina.
दन्तिन्हाथी An elephant८इभ देखिए ।
दुरितसांसारिक कर्म८कर्मन् देखिए ।
Worldly action