गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
DevanagariHindipublished421 पृष्ठ
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परिशिष्ट १
संख्याओं का अभिधान करनेवाले सामान्य और संख्यात्मक अर्थबोधक संस्कृत शब्द
| शब्द | सामान्य अर्थ | संख्या अभिधान | उद्गम |
|---|---|---|---|
| अक्षि | आँख The eye | २ | मनुष्य की दो आँखें होती हैं । |
| अग्नि | आग Fire | ३ | होमाग्नियों की संख्या ३ है, अर्थात् , गार्हपत्य, आहवनीय और दक्षिण । |
| अङ्क | संख्या Number | ९ | शून्य को छोड़कर केवल ९ अङ्क होते हैं । |
| अङ्ग | विज्ञान का एक विभाग<br>An auxiliary division or department of science | ६ | वेदों के अध्ययन के संबंध में ६ विभाग होते हैं, अर्थात् , शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, छन्दस्, ज्योतिष । |
| अचल | पर्वत A mountain | ७ | पौराणिक भूगोल में माने गये ७ मुख्य पर्वत जो कुलाचल कहलाते हैं; अर्थात् , महेन्द्र, मलय, सह्य, शक्तिमत्, ऋक्ष, विंध्य, पारियात्र । |
| अद्रि | पर्वत A mountain | ७ | अचल देखिए । |
| अनन्त | आकाश The sky | ० | आकाश को शून्य समझा जाता है । |
| अनल | आग Fire | ३ | अग्नि देखिए । |
| अनीक | सेना An army | ८ | संस्कृत में ८ प्रकार की सेनाओं का उल्लेख है, अर्थात् पत्ति, सेनामुख, गुल्म, गण, वाहिनी, पृतना, चमू, अनीकिनी । ( जिनागम में गण की जगह अक्षौहिणी का उल्लेख है ।) |
| अन्तरिक्ष | आकाश The sky | ० | अनन्त देखिए । |
| अब्धि | महासागर The ocean | ४ | चार महासागर माने जाते हैं, अर्थात्, पूर्वी, दक्षिणी, पश्चिमी और उत्तरी । |
| अम्बक | आंख The eye | २ | अक्षि देखिए । |
| अम्बर | आकाश The sky | ० | अनन्त देखिए । |