सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 331, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 331
  • ९. ३४ ] छायाव्यवहारः [ २७७
    स्तम्भस्य अवनतिसंख्यानयनसूत्रम्—
    छायावर्गोच्छोध्या नरभाकृतिगुणितशङ्कुकृतिः ।
    सैकनरच्छायाकृतिगुणिता छायाकृतेः शोध्या ॥ ३२ ॥
    तन्मूलं छायायां शोध्यं नरभानवर्गरूपेण¹ ।
    भागं हृत्वा लब्धं स्तम्भस्यावनतिरेव स्यात् ॥ ३३ ॥
    अत्रोद्देशकः
    द्विगुणा पुरुषच्छाया त्र्युत्तरदशहस्तशङ्कोर्भा ।
    एकोनत्रिंशत्सा स्तम्भावनतिश्च का तत्र ॥ ३४ ॥
    १. हस्तलिपि में नरभान के लिए नृभावर्ग पाठ है; परन्तु वह छंद की दृष्टि से अशुद्ध है ।
    किसी स्तंभ अथवा ऊर्ध्वाधर शंकु की अवनति (झुकाव) के माप को निकालने के लिए नियम—
    मानवी छाया के वर्ग और शंकु की ऊँचाई के वर्ग के गुणनफल को दी गई छाया के वर्ग में
    घटाया जाता है । यह शेष, मानवी छाया की वर्ग राशि में एक जोड़ने से प्राप्त योगफल द्वारा गुणित
    किया जाता है । इस प्रकार प्राप्त राशि दी गई छाया के वर्ग में से घटायी जाती है । परिणामी शेष
    के वर्गमूल को छाया के दिये गये माप में से घटाया जाता है । इस प्रकार प्राप्त राशि को जब मानवी
    छाया की वर्ग राशि में एक जोड़ने से प्राप्त योगफल द्वारा भाजित किया जाता है, तब स्तंभ की शुद्ध
    अवनति ( झुकाव ) का माप प्राप्त होता है ॥ ३२-३३ ॥
    उदाहरणार्थ प्रश्न
    इस समय मानवी छाया मानवी ऊँचाई से दुगुनी है । स्तंभ की छाया २९ हस्त है, और
    स्तंभ की ऊँचाई १३ हस्त है । यहाँ स्तंभ की अवनति का माप क्या है ? ॥ ३४ ॥ प्रासाद के भीतर
    ( ३२-३३ ) मानलो अवनत ( झुके हुए ) स्तंभ की
    स्थिति अ ब द्वारा निरूपित है । मानलो वही स्तंभ ऊर्ध्वाधर ( लंब-
    रूप ) स्थिति में अ द द्वारा निरूपित है । क्रमशः अ स तथा अ इ
    उनकी छाया हैं । तब उस समय मानव की छाया और उसकी
    ऊँचाई का अनुपात अ इ / अ द होगी । मानलो यह अनुपात र के बराबर
    है । ब से अद पर गिराया गया लंब ब ग अवनत स्तंभ अ ब की
    अवनति निरूपित करता है । यह सरलता पूर्वक दिखाया जा सकता है कि
    √( (अ ब)² - (ब ग)² ) / (अ स - ब ग) = अ द / अ इ = १ / र । इससे यह देखा जा सकता है कि
    ब ग = [ अ स - √( (अ स)² - { (अ स)² - (अ ब)² × र² } ( र² + १ ) ) ] / ( र² + १ ) ।
    यहाँ दिया गया नियम इसी सूत्र के रूप में प्ररूपित होता है ।