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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 327, कुल 421 में से

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पृष्ठ 327

-९. २० ] छायाव्यवहारः [ २७३
इष्टनाडिकानां छायानयनसूत्रम्—
द्विगुणितदिनभागहृता शङ्कुमितिः शङ्कुमानोना ।
यद्दलच्छ्छायायुक्ता छाया तत्स्वेष्टकालिका भवति ॥ १८ ॥
अत्रोद्देशकः
द्वादशाङ्गुलशङ्कोर्यद्दलच्छायाऽङ्गुलद्वयी ।
दशानां घटिकानां भा का छिन्नादिकं दिनम् ॥ १९ ॥ '
पादच्छायालक्षणे पुरुषस्य पादप्रमाणस्य परिभाषासूत्रम्—
पुरुषोन्नतिसप्तांशस्तत्पुरुषाङ्घ्रेस्तु दैर्घ्यं स्यात् ।
यद्येवं चेत्पुरुषः स भाग्यवानङ्घ्रिभा स्पष्टा ॥ २० ॥
आरूढच्छायायाः संख्यानयनसूत्रम्—


घटियों में दिए गये दिन के समय की संवादी छाया का माप निकालने के नियम—
शंकु ( style ) का माप दिन के दिये गये भाग के माप की दुगुनी राशि द्वारा भाजित किया
जाता है । परिणामी भजनफल में से शंकु का माप घटाया जाता है, और उसमें विषुवच्छाया ( दोपहर
के समय की ऐसे स्थान की छाया, जहाँ दिन रात तुल्य होते हैं ) का माप जोड़ दिया जाता है । यह
दिन के इष्ट समय पर छाया का माप उत्पन्न करता है ॥ १८ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
यदि, किसी १२ अंगुल वाले शंकु के संबंध में, द्युदलच्छाया ( विषुवच्छाया ) २ अंगुल हो, तो
जब १० घटी दिन बीत चुका हो अथवा बीतने वाला हो उस समय शंकु की छाया का माप क्या है ?
दिन का मान ३० घटियाँ होता है ॥ १९ ॥
छाया के पाद प्रमाण माप के द्वारा लिए गये मापों संबंधी मनुष्य के पाद माप की परिभाषा—
किसी मनुष्य की ऊँचाई के १/७ भाग के तुल्य उसके पाद की लंबाई होती है । यदि ऐसा
हो, तो वह मनुष्य भाग्यशाली होगा । इस प्रकार पाद प्रमाण से नापी गई छाया का माप
स्पष्ट है ॥ २० ॥
ऊर्ध्वाधर दीवाल पर आरूढ़ छाया का संख्यात्मक माप निकालने के लिये नियम—

है, जहाँ 'व' शंकु की विषुवच्छाया की लंबाई है । यह सूत्र ऊपर की गाथा ८½ में दिये गये सूत्र की पाद
टिप्पणी पर आधारित है ।
( १८ ) बीजीय रूप से,
छ = उ / २घ - उ + व, जहाँ घ, दिन के समय का माप घटी में दिया गया है । यह सूत्र श्लोक°
१५½ वें की पाद टिप्पणी में दिये गये सूत्र से प्राप्त होता है ।
ग० सा० सं०-३५