गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 328, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें२७४ ] गणितसारसंग्रहः [ ९. २१-
नृच्छायाहतशङ्कुर्भित्तिस्तम्भान्तरोनितो भक्तः ।
नृच्छाययैव लब्धं शङ्कोर्भित्त्याश्रितच्छाया ॥ २१ ॥
अत्रोद्देशकः
विंशतिहस्तः स्तम्भो भित्तिस्तम्भान्तरं करा अष्टौ ।
पुरुषच्छाया द्विघ्ना भित्तिगता स्तम्भभा किं स्यात् ॥ २२ ॥
स्तम्भप्रमाणं च भित्त्यारूढस्तम्भच्छायासंख्यां च ज्ञात्वा भित्तिस्तम्भान्तरसंख्यानयन-
सूत्रम्—
पुरुषच्छायानिघ्नं स्तम्भारूढान्तरं तयोर्मध्यम् ।
स्तम्भारूढान्तरहृततदन्तरं पौरुषी छाया ॥ २३ ॥
शंकु की ऊँचाई ( मनुष्य की ऊँचाई के पदों में व्यक्त ) मनुष्य की छाया द्वारा गुणित की
जाती है । परिणामी गुणनफल दीवाल और शंकु के बीच की दूरी के माप द्वारा हासित किया जाता
है । इस प्रकार प्राप्त अंतर मनुष्य की उपर्युक्त छाया के माप द्वारा भाजित किया जाता है । इस प्रकार
प्राप्त भजनफल शंकु की छाया के उस भाग का माप होता है जो दीवाल पर आरूढ़ है ॥ २१ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
कोई स्तंभ २० हस्त ऊँचा है । इस स्तंभ और दीवाल के बीच की दूरी ( जो छाया रेखानुसार
नापी जाती है ) ८ हस्त है । उस समय मनुष्य की छाया मनुष्य की ऊँचाई से दुगुनी है । स्तंभ की
छाया का वह कौन-सा भाग है जो दीवाल पर आरूढ़ है ? ॥ २२ ॥
जब दीवाल पर आरूढ़ ( पड़ी हुई ) छाया का संख्यात्मक मान तथा स्तंभ की ऊँचाई, दोनों
ज्ञात हों, तब दीवाल और स्तंभ के अंतर ( बीच की दूरी ) के माप के संख्यात्मक मान को निकालने
के लिये नियम—
स्तंभ की ऊँचाई और दीवाल पर आरूढ़ ( पड़ी हुई ) छाया के माप का अंतर ( मनुष्य की
ऊँचाई के पदों में व्यक्त ) पुरुष की छाया के माप द्वारा गुणित होकर, उक्त स्तंभ और दीवाल के अंतर
की माप को उत्पन्न करता है । इस अंतर का मान, स्तंभ की ऊँचाई और दीवाल पर आरूढ़ (पड़ी हुई)
छायांश माप के अंतर द्वारा भाजित किया जाने पर, ( मनुष्य की ऊँचाई के पदों में व्यक्त) मानवी छाया
का माप उत्पन्न करता है ॥ २३ ॥
( २१ ) बीजीय रूप से,
अ = (उ × ब - स) / ब , जहाँ उ शंकु की ऊँचाई है,
अ दीवाल पर आरूढ़ छाया की ऊँचाई के पदों में व्यक्त
मनुष्य की छाया का माप है, और स स्तंभ ( शंकु ) और
दीवाल के बीच की दूरी है । नियम का स्पष्टीकरण पार्श्व में
दिये गये चित्र द्वारा हो जाता है । यह बात ध्यान में रखने
- योग्य है कि यहाँ स्तंभ और दीवाल के बीच की दूरी छाया रेखा पर ही नापी जाना चाहिए ।
( २३ और २६ ) इस नियम तथा २६ वीं गाथा के नियम में २१ वीं गाथा में दिये गये उदाहरणों
की विलोम दशा का उल्लेख है ।