गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 303, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-७. २३०½ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ २४९
अत्रोद्देशकः
दश वृत्तस्य विष्कम्भः शिञ्जिन्यभ्यन्तरे सखे ।
दृष्टाष्टौ हि पुनस्तस्याः कः स्यादधिगमो वद ॥ २२८½ ॥
ज्यासंख्यां च बाणसंख्यां च ज्ञात्वा समवृत्तक्षेत्रस्य मध्यव्याससंख्यानयनसूत्रम्—
भक्तश्रतुर्गुणेन च शरेण गुणवर्गराशिरिषुसहितः ।
समवृत्तमध्यस्थितविष्कम्भोऽयं विनिर्दिष्टः ॥ २२९½ ॥
अत्रोद्देशकः
कस्यापि च समवृत्तक्षेत्रस्याभ्यन्तराधिगमनं द्वे ।
ज्या दृष्टाष्टौ दण्डा मध्यव्यासो भवेत्कोऽत्र ॥ २३०½ ॥
समवृत्तद्वयसंयोगे एका मत्स्याकृतिर्भवति । तन्मत्स्यस्य मुखपुच्छविनिर्गतरेखा कर्तव्या ।
तया रेखया अन्योन्याभिमुखधनुर्द्वयाकृतिर्भवति । तन्मुखपुच्छविनिर्गतरेखैव तद्धनुर्द्वयस्यापि
ज्याकृतिर्भवति । तद्धनुर्द्वयस्य शरद्वयमेव वृत्तपरस्परसंपातशरौ ज्ञेयौ । समवृत्तद्वयसंयोगे तयोः
संपातशरयोरानयनस्य सूत्रम्—
उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी दिये गये वृत्त के व्यास का माप १० है । साथ ही ज्ञात है कि भीतरी धनुष-डोरी का
माप ८ है । हे मित्र, उस धनुष डोरी के संबंध में बाण रेखा का मान निकालो ॥ २२८½ ॥
जब धनुष-डोरी और बाण के संख्यात्मक मान ज्ञात हों, तब दिये गये वृत्त के व्यास के
संख्यात्मक मान को निकालने के लिये नियम—
धनुष-डोरी के मान के वर्ग का निरूपण करने वाली संख्या, ४ द्वारा गुणित बाण के मान के
द्वारा भाजित की जाती है । तब परिणामी भजनफल में बाण का मान जोड़ा जाता है । इस प्रकार प्राप्त
राशि नियमित वृत्त की, केन्द्र से होकर मापी गई, चौड़ाई का माप होती है ॥ २२९½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
किसी समवृत्त क्षेत्र के संबंध में, बाण रेखा २ दंड, और धनुष डोरी ८ दंड है । इस वृत्त के
संबंध में व्यास का मान क्या हो सकता है ? ॥ २३०½ ॥
जब दो वृत्त परस्पर एक दूसरे को काटते हैं, तब मछली के आकार की आकृति उत्पन्न होती
है । इस मत्स्याकृति के संबंध में मुख से पुच्छ को मिलानेवाली रेखा खींची जाती है । इस सरल
रेखा की सहायता से एक दूसरे के सम्मुख दो धनुषों की उत्पत्ति होती है । मुख से पुच्छ को मिलाने
वाली सरल रेखा इन दोनों धनुषों की धनुष-डोरी होती है । इन दो धनुषों के संबंध में दो बाण
रेखाएँ पारस्परिक अतिछादी ( overlapping ) वृत्तों से संबंधित दो बाण रेखाओं को बनाने-
वाली समझी जाती हैं । जब दो समवृत्त परस्पर एक दूसरे को काटते हैं, तब अतिछादी
( overlapping ) भाग से संबंधित बाण रेखाओं के मानों को निकालने के लिये नियम—
ग० सा० सं०-३२