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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 270, कुल 421 में से

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पृष्ठ 270

२१६ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. १२३½-
अत्रोद्देशकः
एकद्विकद्विकत्रिकचतुष्कसप्तैकसाष्टकानां च ।
गणक चतुर्णां शीघ्रं बीजैरुत्थाप्य कोटिभुजाः ॥ १२३½ ॥
आयतचतुरश्राणां क्षेत्राणां विषमबाहुकानां च ।
कर्णोऽत्र पञ्चषष्टिः क्षेत्राण्याचक्ष्व कानि स्युः ॥ १२४½ ॥
इष्टजन्यायताचतुरश्रक्षेत्रस्य रज्जुसंख्यां च कर्णसंख्यां च ज्ञात्वा तज्जन्यायताचतुरश्रक्षेत्रस्य
भुजकोटिसंख्यानयनसूत्रम्—
कर्णकृतौ द्विगुणायां रज्ज्वर्धकृतिं विशोध्य तन्मूलम् ।
रज्ज्वर्धे संक्रमणीकृते भुजा कोटिरपि भवति ॥ १२५½ ॥
अत्रोद्देशकः
परिधिः स चतुस्त्रिंशत् कर्णाश्चात्र त्रयोदशो दृष्टः ।
जन्यक्षेत्रस्यास्य प्रगणय्याचक्ष्व कोटिभुजौ ॥ १२६½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
हे गणितज्ञ, दिये गये बीजों की सहायता से, ऐसे चार आयत क्षेत्रों की लंब भुजाएँ और
आधारों के मानों को शीघ्र बतलाओ, जिनके क्रमशः १ और २, २ और ३, ४ और ७, तथा १ और
८ बीज हैं, तथा जिनके आधार भिन्न भिन्न हैं । ( इस प्रश्न में ) यहाँ कर्ण का मान ६५ है । इस
दशामें, इष्ट क्षेत्रों के मापों को बतलाओ ॥ १२३½-१२४½ ॥
जिसकी परिमिति का माप और कर्ण का माप ज्ञात है ऐसे जन्य आयत क्षेत्र के आधार और
उसकी लम्ब भुजा के संख्यात्मक मानों को निकालने के लिये नियम—
कर्ण के वर्ग को २ से गुणित करो । परिणामी गुणनफल में से परिमिति की अर्द्धराशि के वर्ग
को घटाओ । तब परिणामी अंतर के वर्गमूल को प्राप्त करो । यदि यह वर्गमूल आधी परिमिति के
साथ संक्रमण क्रिया में लाया जाय, तो इष्ट आधार और लम्ब भुजा भी उत्पन्न होती हैं ॥ १२५½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
इस दशामें परिमिति ३४ है, और कर्ण १३ है । इस जन्य आकृति के संबंध में लंब भुजा और
आधार के मापों को गणना के बाद बतलाओ ॥ १२६½॥
(१२५½) यदि किसी आयत की भुजाएं अ और ब द्वारा प्ररूपित हों, तो √(अ² + ब²) कर्ण
का माप होता है और परिमिति का माप २अ + २ब होता है । यह सरलतापूर्वक देखा जा सकता
है कि
{ (२अ + २ब)/२ + √[ २ ( √(अ² + ब²) )² - ( (२अ + २ब)/२ )² ] } ÷ २ = अ; और
{ (२अ + २ब)/२ - √[ २ ( √(अ² + ब²) )² - ( (२अ + २ब)/२ )² ] } ÷ २ = ब ।
ये दो सूत्र वर्णित रीति का यहां बीजीय रूप से निरूपण करते हैं ।