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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 246, कुल 421 में से

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पृष्ठ 246

१९२ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. ४७-
बहिरन्तश्चतुरश्रकवृत्तस्य व्यावहारिकफलानयनसूत्रम्—
बाह्ये वृत्तस्येदं क्षेत्रस्य फलं त्रिसंगुणं दलितम् ।
अभ्यन्तरे तदर्धं विपरीते तत्र चतुरश्रे ॥ ४७ ॥
अत्रोद्देशकः
पञ्चदशबाहुकस्य क्षेत्रस्याभ्यन्तरं बहिर्गणितम् ।
चतुरश्रस्य च वृत्तव्यवहारफलं ममाचक्ष्व ॥ ४८ ॥
इति व्यावहारिकगणितं समाप्तम् ।
अथ सूक्ष्मगणितम्
इतः परं क्षेत्रगणिते सूक्ष्मगणितव्यवहार मुदाहरिष्यामः । तद्यथा १ आबाधावलम्ब-
कानयनसूत्रम्—
भुजकृत्यन्तरभूहृतभूसंक्रमणं त्रिबाहुकाबाधे ।
तद्भुजवर्गान्तरपदमवलम्बकमाहुराचार्याः ॥ ४९ ॥
१. इसके पश्चात् M में निम्नलिखित और जुड़ा है—
त्रिभुज क्षेत्रस्य भुजद्वयसंयोगस्थानमारभ्यअधस्स्थित भूमि संस्पृष्ट रेखाया नाम अवलम्बकः स्यात् ।
चतुर्भुज के बहिर्लिखित और अन्तर्लिखित वृत्त के क्षेत्रफल के व्यावहारिक मान को निकालने
के लिये नियम--
अंतर्लिखित चतुर्भुज के क्षेत्रफल के माप की तिगुनी राशि की अर्द्धराशि ऐसे बाहरी परिगत वृत्त
के क्षेत्रफल का माप होती है । उस दशा में जबकि वृत्त अन्तर्लिखित हो और चतुर्भुज बहिर्गत हो, तब
ऊपर के प्राप्त माप की अर्द्धराशि इष्ट राशि होती है ॥ ४७ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
चतुर्भुज क्षेत्र की प्रत्येक भुजा १५ है । मुझे अंतर्गत और बहिर्गत वृत्तों के व्यावहारिक क्षेत्रफल
के माप बतलाओ ॥ ४८ ॥
इस प्रकार क्षेत्रगणित व्यवहार में व्यावहारिक गणित नामक प्रकरण समाप्त हुआ ।
सूक्ष्म गणित
इसके पश्चात् हम गणित में क्षेत्रफलों के माप सम्बन्धी सूक्ष्म गणित नामक विषय का प्रतिपादन
करेंगे । वह इस प्रकार है—
किसी दिये हुए त्रिभुज के आबाधाओं (खंड जिनमें की आधार लम्ब के द्वारा विभाजित हो जाता
है ) और अवलम्ब ( शीर्ष से आधार पर गिराया हुआ लम्ब ) के माप निकालने के लिये नियम--
भुजाओं के वर्गों को आधार द्वारा भाजित करने से प्राप्त राशि और आधार के बीच संक्रमण
क्रिया करने से त्रिभुज की आबाधाओं ( आधार के खंडों ) के माप प्राप्त होते हैं । आचार्य कहते हैं
कि इन आबाधाओं में से एक, और संवादी आसन्न भुजा के वर्गों के अंतर का वर्गमूल अवलम्ब का
माप होता है ॥ ४९ ॥
( ४७ ) यहाँ दिया गया सूत्र वर्ग के सम्बन्ध में ठीक माप देता है, परन्तु अन्य चतुर्भुजों के
सम्बन्ध में जब π का मान ३ लेते हैं, तब केवल अनुमानिक मान प्राप्त होता है ।
( ४९ ) बीजीय रूप से प्ररूपित होने पर—