गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 245, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-७. ४६ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ १९१
अत्रोद्देशकः
ज्या षड्िंवशतिरेषा त्रयोदशेषुश्च कार्मुकं दृष्टम्।
किं गणितमस्य काष्ठं किं वाचक्ष्वाशु मे गणक ॥ ४४ ॥
बाणगुणप्रमाणानयनसूत्रम्—
गुणचापकृतिविशेषात् पञ्चहृतात्पदमिरिषुः समुद्दिष्टः।
शरवर्गात्पञ्चगुणादूना धनुषः कृतिः पदं जीवा ॥ ४५ ॥
अत्रोद्देशकः
अस्य धनुःक्षेत्रस्य शरोऽत्र न ज्ञायते परस्यापि।
न ज्ञायते च मौर्वी तद्द्वयमाचक्ष्व गणितज्ञ ॥ ४६ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
एक धनुषाकार क्षेत्र की डोरी २६ है एवं बाण १३ है । हे गणक, शीघ्रही मुझे इसके क्षेत्रफल
और झुके हुए काष्ठ का माप बतलाओ ॥ ४४ ॥
धनुषाकार क्षेत्र के सम्बन्ध में बाणमाप और गुण ( डोरी ) प्रमाण निकालने के लिये नियम—
डोरी और झुके हुए धनुष के वर्गों के अन्तर को ५ द्वारा भाजित करते हैं । परिणामी भजन
फल का वर्गमूल बाण का इष्ट माप होता है । बाण के वर्ग को ५ द्वारा गुणित कर, प्राप्त गुणनफल को
धनुष के चाप के वर्ग में से घटाते हैं । इस परिणामी राशि का वर्गमूल डोरी के संवादी माप को
देता है ॥ ४५ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
धनुषाकार क्षेत्र के बाण का माप अज्ञात है, और दूसरे ऐसे ही क्षेत्र की डोरी का माप अज्ञात
है । हे गणितज्ञ, इन दोनों मापों को निकालो ॥ ४६ ॥
धनुष क्षेत्र का क्षेत्रफल निकालने के लिये दिया गया सूत्र, चीन की सम्भवतः पुस्तकों को २१३ ईस्वी
पूर्व में जलाये जाने की घटना से पूर्व की पुस्तक च्यु—चांग सुआन—चु ( नवाध्यायी अंकगणित ) में
भी इसी रूप में दृष्टिगत होता है ।
क्षेत्रफल = ( क + ल ) × ल / २ यहाँ च = चाप,
धनुष की लम्बाई = √ ५ल² + क² क = चापकर्ण,
ल = लम्ब है ।
बाण की लम्बाई = {√ च² - क² } १/५ सूक्ष्म मानों के लिये इस अध्याय की ७३½ और
७४½ वीं गाथाओं को देखिये ।
पुनः धनुष की डोरी की लम्बाई = √ च² - ५ ल²
जम्बू द्वीप प्रज्ञप्ति ( ६/९ ) में तथा त्रिलोक प्रज्ञप्ति.( ४/२५९८ ) में यह मान क्रमशः इस प्रकार
दिया गया है—
जीवा = √( (व्यास - बाण) ४ बाण कूलिज के अनुसार पायथेगोरस के साध्य पर आधारित
इस सूत्र का उद्गम बाबुल में प्रायः २६०० ईस्वी पूर्व
व्यास = [ ४ (बाण)² + (जीवा)² ] / ४ बाण स्फानलिपि ग्रंथों में दृष्टि गत हुआ है । इस सम्बन्ध
में तिलोय पण्णत्तिका गणित द्रष्टव्य है ।