सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 239

-७. २२ ] क्षेत्रगणितव्यवहारः [ १८५
हस्तौ द्वौ विष्कम्भः पृष्ठेऽष्टाषष्टिरिह च संदृष्टाः ।
उदरे तु द्वात्रिंशद्बालेन्दोः किं फलं कथय ॥ १८ ॥
वृत्तक्षेत्रफलानयनसूत्रम्—
त्रिगुणीकृतविष्कम्भः परिधिर्व्यासार्धवर्गराशिरयम् ।
त्रिगुणः फलं समेऽर्धे वृत्तेऽर्धं प्राहुराचार्याः ॥ १९ ॥
अत्रोद्देशकः
व्यासोऽष्टादश वृत्तस्य परिधिः कः फलं च किम् ।
व्यासोऽष्टादश वृत्तार्धे गणितं किं वदाशु मे ॥ २० ॥
आयतवृत्तक्षेत्रफलानयनसूत्रम्—
व्यासार्धयुतो द्विगुणित आयतवृत्तस्य परिधिरायामः ।
विष्कम्भचतुर्भागः परिवेषहतो भवेत्सारम् ॥ २१ ॥
अत्रोद्देशकः
क्षेत्रस्यायतवृत्तस्य विष्कम्भो द्वादशैव तु । आयामस्तत्र षट्त्रिंशत् परिधिः कः फलं च किम् ॥२२॥
भीतरी वक्र ३२ हस्त है । बतलाओ की परिणामी क्षेत्रफल क्या है ? ॥ १८ ॥
वृत्त का व्यावहारिक क्षेत्रफल निकालने के लिये नियम—
व्यास को ३ द्वारा गुणित करने से परिधि प्राप्त होती है, और व्यास (विष्कम्भ) की अर्द्ध
राशि के वर्ग को ३ द्वारा गुणित करने से पूर्ण वृत्त का क्षेत्रफल प्राप्त होता है । आचार्य कहते हैं कि
अर्द्धवृत्त का क्षेत्रफल और परिधि का माप इनसे आधा होता है ॥ १९ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
वृत्त का व्यास १८ है । उसकी परिधि और परिणामी क्षेत्रफल क्या है ? अर्द्धवृत्त का व्यास
१८ है । शीघ्र कहो कि उसके क्षेत्रफल और परिधि क्या हैं ? ॥ २० ॥
आयत वृत्त (ऊनेन्द्र अथवा अंडाकार) आकृति का क्षेत्रफल निकालने के लिये नियम—
बड़े व्यास को छोटे व्यास की अर्द्ध राशि द्वारा बढ़ाकर और तब २ द्वारा गुणित करने पर
आयतवृत्त (ऊनेन्द्र) की परिधि का आयाम (लम्बाई) प्राप्त होता है । छोटे व्यास की एक चौथाई
राशि को परिधि द्वारा गुणित करने पर क्षेत्रफल का माप प्राप्त होता है ॥ २१ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
ऊनेन्द्र आकृति (elliptical figure) के सम्बन्ध में छोटा व्यास १२ है और बड़ा व्यास
३६ है । परिधि और परिणामी क्षेत्रफल क्या हैं ? ॥ २२ ॥
(१९) परिधि और क्षेत्रफल का माप यहाँ (परिधि / व्यास = π) का मान ३ लेकर दिया गया है ।
(२१) ऊनेन्द्र (आयतवृत्त या अंडाकृति) की परिधि के लिये दिया गया सूत्र स्पष्ट रूप से
कोई भिन्न प्रकार का अनुमान है । ऊनेन्द्र का क्षेत्रफल (π. अ. ब.) होता है, जहाँ अ और ब इस
आयत वृत्त की क्रमशः बड़ी और छोटी अर्धाक्ष (semiaxes) हैं । यदि π का मान ३ लें तब
π. अ. ब = ३ अ. ब होता है । परन्तु इस गाथा में दिये गये सूत्र से क्षेत्रफल का माप
{ (२ अ + २ ब / २) २ } १/४ . २ ब = २ अब + ब² होता है ।
ग० सा० सं०-२४