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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 240, कुल 421 में से

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पृष्ठ 240

१८४ ] गणितसारसंग्रहः [ ७. २३-
शङ्खाकारवृत्तस्य फलानयनसूत्रम्—
वदनाधोनो व्यासस्त्रिगुणः परिधिस्तु कम्बुकावृत्ते ।
वलयार्धकृतिर्यंशो मुखार्धवर्गत्विपाद्युतः ॥ २३ ॥
अत्रोद्देशकः
व्यासोऽष्टादश हस्ता मुखविस्तारोऽयमपि च चत्वारः ।
कः परिधिः किं गणितं कथय त्वं कम्बुकावृत्ते ॥ २४ ॥
निम्नोन्नतवृत्तयोः फलानयनसूत्रम्—
परिधेश्च चतुर्थांगो विष्कम्भगुणः स विद्धि गणितफलम् ।
चत्वाले कूर्मनिभे क्षेत्रे निम्नोन्नते तस्मात् ॥ २५ ॥
शंख के आकार की वक्ररेखीय आकृति का परिणामी क्षेत्रफल निकालने के लिये नियम—
शंख के आकार के वक्ररेखीय ( curvilinear ) आकृति के सम्बन्ध में, सबसे बड़ी चौड़ाई
को मुख की अर्द्ध राशि द्वारा हासित और ३ द्वारा गुणित करने पर परिमिति ( परिधि ) प्राप्त होती है ।
इस परिमिति की अर्द्धराशि के वर्ग के एक तिहाई भाग को मुख की अर्द्धराशियों के वर्ग की तीन चौथाई
राशि द्वारा हासित करते हैं; इस प्रकार क्षेत्रफल प्राप्त होता है ॥ २३ ॥
उदाहरणार्थ एक प्रश्न
शंख (कम्बुकावृत्त) की आकृति के सम्बन्ध में चौड़ाई १८ हस्त और मुख ४ हस्त है । उसकी
परिमिति तथा क्षेत्रफल निकालो ॥ २४ ॥
नतोदर और उन्नतोदर वर्तुल तलों के क्षेत्रफल निकालने के लिये नियम—
समझो कि परिधि की एक चौथाई राशि को व्यास द्वारा गुणित करने पर परिणामी क्षेत्रफल
प्राप्त होता है । इस प्रकार चत्वाल और कछुवे की पीठ जैसे नतोदर और उन्नतोदर क्षेत्रों का क्षेत्रफल
प्राप्त करना पड़ता है ॥ २५ ॥
( २३ ) यदि अ व्यास हो और म मुख का माप हो, तब ३ ( अ - १/२ म ) परिधि का माप होता
है और { ३ ( अ - १/२ म ) / २ }² × १/३ + ३/४ × ( म / २ )² क्षेत्रफल का माप होता है । दिये हुए वर्णन से
आकृति का आकार स्पष्ट नहीं है । परन्तु परिधि और क्षेत्रफल के लिये दिये गये मानों से वह एक ही
व्यास पर दो और भिन्न-भिन्न व्यास वाले वृत्तों को खींचकर प्राप्त हुई आकृति का आकार माना जा
सकता है, जो ६ वीं गाथा के नोट में १२ वीं आकृति में बतलाया गया है ।
( २५ ) यहाँ निर्दिष्ट क्षेत्रफल गोलीय खंड का ज्ञात होता है । प्रतीक रूप से यह क्षेत्रफल
( प/४ × व ) के बराबर है, जहाँ प छेदीय वृत्त ( किनार ) की परिधि है और व व्यास है । परन्तु इस
प्रकार के गोलीय खंड के तल का क्षेत्रफल ( २ × π × त्र × उ ) होता है, जहाँ π = परिधि / व्यास ,
त्र = केन्द्रीय वृत्त ( किनार ) की त्रिज्या, और उ गोलीय खंड की ऊँचाई है ।