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गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 421 में से

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पृष्ठ 190

१३६ ] मिश्रकव्यवहारः [ ६. १७०–
अत्रोद्देशकः
एकक्षयमेकं च द्विक्षयमेकं त्रिवर्णमेकं च । वर्णचतुष्के च द्वे पञ्चक्षयिकाश्च चत्वारः ॥ १७० ॥
सप्त चतुर्दशवर्णास्त्रिगुणितपञ्चक्षयाश्चाष्टौ । एतानेकीकृत्य ज्वलने क्षिप्त्वैव मिश्रवर्णं किम् ।
एतन्मिश्रसुवर्णं पूर्वैर्भक्तं च किं किमेकस्य ॥ १७१ ½ ॥
दृष्टवर्णानामिष्टस्ववर्णानयनसूत्रम्—
स्वैःस्वैर्वर्णैर्हतंमिश्रं स्वर्णमिश्रेण भाजितम् । लब्धं वर्णं विजानीयात्तदिष्टप्राप्तं पृथक् पृथक् ॥ १७२ ½ ॥
अत्रोद्देशकः
विंशतिपणस्तु षोडश वर्णा दशवर्णपरिमाणैः ।
परिवर्तिता वद त्वं कति हि पुराणा भवन्त्यधुना ॥ १७३ ½ ॥
अष्टोत्तरशतकनकं वर्णाष्टांशत्रयेन संयुक्तम् ।
एकादशवर्णं चतुरुत्तरदशवर्णकैः कृतं च किं हेम ॥ १७४ ½ ॥
अज्ञातवर्णानयनसूत्रम्—
कनकक्षयसंवर्गं मिश्रं स्वर्णेन्नमिश्रतः शोद्ध्यम् । स्वर्णेन हृतं वर्णं वर्णविशेषेण कनकं स्यात् ॥ १७५ ½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
स्वर्ण का एक भाग १ वर्ण का है, एक भाग २ वर्णों का है, एक भाग ३ वर्णों का है, २
भाग ४ वर्णों के हैं, ४ भाग ५ वर्णों के हैं, ७ भाग १४ वर्णों के हैं, और ८ भाग १५ वर्णों के हैं ।
इन्हें अग्नि में डालकर एक पिण्ड बना लिया जाता है । बतलाओ कि इस प्रकार मिश्रित स्वर्ण किस
वर्ण का है ? यह मिश्रित स्वर्ण उन भागों के स्वामियों में वितरित कर दिया जाता है । प्रत्येक को
क्या मिलता है ? ॥ १७०–१७१ ½ ॥
जो मान में दिये गये वर्णों वाली दत्त स्वर्ण की मात्राओं के तुल्य है ऐसे किसी वाञ्छित
वर्ण वाले स्वर्ण का ( इच्छित ) वजन निकालने के लिये नियम—
स्वर्ण की दी गई मात्राओं को अलग-अलग उनके ही वर्ण द्वारा क्रमवार गुणित किया जाता
है, और गुणनफलों को जोड़ दिया जाता है । परिणामी योग को मिश्रित स्वर्ण के कुल वजन द्वारा
भाजित किया जाता है । भजनफल को परिणामी औसत वर्ण समझ लिया जाता है । यह उपर्युक्त
गुणनफलों का योग, इस स्वर्ण के समान ( इच्छित ) वजन को लाने के लिये, अलग-अलग वाञ्छित
वर्णों द्वारा भाजित किया जाता है ॥ १७२ ½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
१६ वर्ण के २० पण वजनवाले स्वर्ण को १० वर्ण वाले स्वर्ण से बदला गया है; बतलाओ
कि अब वह वजन में कितने पण हो जावेगा ? ॥ १७३ ½ ॥ ११ ३/८ वर्ण वाला १०८ वजन का स्वर्ण १४
वर्ण वाले स्वर्ण से बदला जाने पर कितने वजन का हो जावेगा ? ॥ १७४ ½ ॥
अज्ञात वर्ण को निकालने के लिये नियम—
स्वर्ण की कुल मात्रा को मिश्रण के परिणामी वर्ण से गुणित करो । प्राप्त गुणनफल में से उस
योग को घटाओ जो स्वर्ण की विभिन्न घटक मात्राओं को उनके निज के वर्णों द्वारा गुणित करने से
प्राप्त गुणनफलों को जोड़ने पर प्राप्त होता है । जब शेष को अज्ञात वर्ण वाले स्वर्ण की ज्ञात घटक
मात्रा से विभाजित किया जाता है, तब इष्ट वर्ण उत्पन्न होता है; और जब वह शेष परिणामी वर्ण
तथा ( स्वर्ण की अज्ञात घटक मात्रा के ) ज्ञात वर्ण के अंतर द्वारा भाजित किया जाता है, तब उस
स्वर्ण का इष्ट वजन उत्पन्न होता है ॥ १७५ ½ ॥