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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 191, कुल 421 में से

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पृष्ठ 191

–६. १८१ ] मिश्रकव्यवहारः [ १३७
अज्ञातवर्णस्य पुनरपि सूत्रम्—
स्वस्ववर्णविनिहतयोगं स्वर्णैक्यदृढहताच्छोध्यम् । अज्ञातवर्णहेम्ना भक्तं वर्णं बुधाः प्राहुः ॥१७६ १/२॥
अत्रोद्देशकः
१षड्जलधिवह्निकनकैस्त्रयोदशाष्टर्तुवर्णकैः क्रमशः । अज्ञातवर्णहेम्नः पञ्च विमिश्रक्ष्यं च सैकदश ।
अज्ञातवर्णसंख्यां ब्रूहि सखे गणिततत्त्वज्ञ ॥ १७८ ॥
चतुर्दशैव वर्णानि सप्त स्वर्णानि तत्क्षये२ । चतुस्स्वर्णे दशोत्पन्नमज्ञातक्षयकं वद ॥ १७९ ॥
अज्ञातस्वर्णानयनसूत्रम् —
स्वस्ववर्णविनिहतयोगं स्वर्णैक्यगुणितदृढवर्णात् ।
त्यक्त्वाज्ञातस्वर्णक्षयदृढवर्णान्तराहतं कनकम् ॥ १८० ॥
अत्रोद्देशकः
द्वित्रिचतुःक्षयमानान्त्रिभिः कनकास्त्रयोदशक्षयिकः ।
वर्णयुतिर्दश जाता ब्रूहि सखे कनकपरिमाणम् ॥ १८१ ॥
१. यहाँ रनल के स्थान में वह्नि, और ष्टावृत्तुक्षयेः के स्थान में र्तुवर्णकैः आदेशित किया गया है,
ताकि पाठ व्याकरण की दृष्टि से और उत्तम हो जावे ।
२. हस्तलिपि में पाठ तत्क्षय है, जो स्पष्टरूप से अशुद्ध है ।
अज्ञात वर्ण के सम्बन्ध में एक और नियम—
स्वर्ण की विभिन्न संघटक मात्राओं को उनके क्रमवार वर्णों से (respectively) गुणित करते
हैं । प्राप्त गुणनफलों के योग को परिणामी वर्ण तथा स्वर्ण की कुलमात्रा के गुणनफल में से घटाते हैं ।
बुद्धिमान व्यक्ति कहते हैं कि यह शेष जब अज्ञात वर्णवाले स्वर्ण के वजन द्वारा भाजित किया जाता
है तब इष्ट वर्ण उत्पन्न होता है ॥१७६ १/२॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
क्रमशः १३, ८ और ६ वर्ण वाले ६, ४ और ३ वजन वाले स्वर्ण के साथ अज्ञात वर्ण वाला ५
वजन का स्वर्ण मिलाया जाता है । मिश्रित स्वर्ण का परिणामी वर्ण ११ है । हे गणना के भेदों को जानने
वाले मित्र ! मुझे इस अज्ञात वर्ण का संख्यात्मक मान बतलाओ ॥१७७ १/२–१७८॥ दिये गये नमूने
का ७ वजन वाला स्वर्ण १४ वर्ण वाला है । ४ वजन वाला अन्य स्वर्ण का नमूना (प्रादर्श) उसमें
मिला दिया जाता है । परिणामी वर्ण १० है । दूसरे नमूने के स्वर्ण का अज्ञात वर्ण क्या है ? ॥१७९॥
स्वर्ण का अज्ञात वजन निकालने के लिये नियम —
स्वर्ण की विभिन्न संघटक मात्राओं को निज के वर्णों द्वारा गुणित करते हैं । प्राप्त गुणनफलों
के योग को, स्वर्ण के ज्ञात भारों को अभिनव दृढ़ (durable) परिणामी वर्ण द्वारा गुणित करने
से प्राप्त गुणनफलों के योग में से घटाते हैं । शेष को स्वर्ण की अज्ञात मात्रा के ज्ञात वर्ण तथा
मिश्रित स्वर्ण के दृढ़ ( durable ) परिणामी वर्ण के अन्तर द्वारा भाजित करने पर स्वर्ण का वजन
प्राप्त होता है ॥१८०॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
स्वर्ण के तीन टुकड़े जिनमें से प्रत्येक वजन में ३ है, क्रमशः २, ३ और ४ वर्ण वाले हैं । ये
१३ वर्ण वाले अज्ञात वजन के स्वर्ण में गलाये जाते हैं । परिणामी- वर्ण १० होता है । हे मित्र !
मुझे बतलाओ कि अज्ञात भारवाले स्वर्ण का माप क्या है ? ॥१८१॥
ग० सा० सं०-१८