गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 182, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें१२८ ] गणितसारसंग्रहः [ ६. १४४½-
अत्रोद्देशकः
अथ मातुलुङ्गकदलीकपित्थदाडिमफलानि मिश्राणि ।
प्रथमस्य सैकविंशतिरथ द्विरग्रा द्वितीयस्य ॥ १४४½ ॥
विंशतिरथ सुरभीणि च पुनस्त्रयोविंशतिस्तृतीयस्य ।
तेषां मूल्यसमासस्त्रिसप्ततिः किं फलं कोऽर्घः ॥ १४५½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
यहाँ, ३ ढेरियों में सुगन्धित मातुलुङ्ग, कदली, कपित्थ और दाडिम फलों को इकट्ठा किया
गया है । प्रथम ढेरी में २१, दूसरी में २२, और तीसरी में २३ हैं । इन ढेरियों में से प्रत्येक की
मिश्रित कीमत ७३ है । प्रत्येक ढेरी में विभिन्न फलों की संख्या और भिन्न प्रकार के फलों की कीमत
निकालो । ॥ १४४½ और १४५½ ॥
नियम स्पष्ट हो जावेगा ।
प्रथम ढेरी में फलों की कुल संख्या २१ है ।
दूसरी ” ” ” ” २२ है ।
तीसरी ” ” ” ” २३ है ।
मन से कोई भी संख्या जैसे, २ चुनने पर और उससे इन कुल संख्याओं को गुणित करने पर हमें
४२, ४४, ४६ प्राप्त होते हैं । इन्हें अलग-अलग ढेरियों के मूल्य ७३ में से घटाने पर शेष ३१, २९ और
२७ प्राप्त होते हैं । इन्हें मन से चुनी हुई दूसरी संख्या ८ द्वारा भाजित करने पर भजनफल ३, ३, ३
और शेष ७, ५ और ३ प्राप्त होते हैं । ये शेष, पुनः, मन से चुनी हुई संख्या २ द्वारा भाजित होनेपर
भजनफल ३, २, १ और शेष १, १, १ उत्पन्न करते हैं । इन अंतिम शेषों को यहाँ मन से चुनी हुई
संख्या १ द्वारा भाजित करने पर भजनफल १, १, १ प्राप्त होते हैं और शेष कुछ भी नहीं । पहिली
कुल संख्या के सम्बन्ध में निकाले गये भजनफलों को उसमें से घटाना पड़ता है । इस प्रकार हमें
२१ - (३ + ३ + १) = १४ प्राप्त होता है; यह संख्या और भजनफल ३, ३, १ प्रथम ढेरी में भिन्न प्रकारों
के फलों की संख्या निरूपित करते हैं । इसी प्रकार, हमें दूसरे समूह में १६, ३, २, १ और तीसरे समूह
में १८, ३, १, १ विभिन्न प्रकार के फलों की संख्या प्राप्त होती है ।
प्रथम चुना हुआ गुणक २, और उसके अन्य मन से चुने हुए गुणकों के योग कीमतें होती हैं ।
इस प्रकार, हमें क्रम से इन ४ भिन्न प्रकारों के फलों में प्रत्येक की कीमत २, २ + ८ या १०, २ + २ या
४, और २ + १ या ३, रूप में प्राप्त होती है ।
इस रीति का मूलभूत सिद्धान्त निम्नलिखित बीजीय निरूपण द्वारा स्पष्ट हो जावेगा—
अक + ब ख + स ग + ड घ = प, …………………………………………………(१)
अ + ब + स + ड = न,…………………………………………………(२)
मानलो घ = श; तब (२) को श से गुणित करने पर हमें श ( अ + ब + स + ड ) = श न
प्राप्त होता है ।……………………………………………………………………(३)
(३) को (१) में से घटाने पर हमें अ ( क - श) + ब ( ख - श) + स ( ग - श ) = प - श न
प्राप्त होता है ।……………………………………………………………………(४)