गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 183, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें-६. १४९ ] मिश्रकव्यवहारः [ १२९
जघन्योनमिश्रितराश्यानयनसूत्रम्—
पण्यहृताल्पफलोनैरिच्छन्द्यादल्पमूल्यहीनेष्टम् ।
कृत्वा तावत्खण्डं तदूनमूल्यं जघन्यपण्यं स्यात् ॥ १४६½ ॥
अत्रोद्देशकः
द्वाभ्यां त्रयो मयूरास्त्रिभिश्च पारावताश्च चत्वारः ।
हंसाः पञ्च चतुर्भिः पञ्चभिरथ सारसाः षट् च ॥ १४७½ ॥
यत्रार्घस्तत्र सखे षट्पञ्चाशत्पणैः खगान् क्रीत्वा ।
द्वासप्ततिमानयतामित्युक्त्वा मूलमेवादात् ।
कतिभिः पणैस्तु विहगाः कति विगणय्याशु जानीयाः ॥ १४९ ॥
कुल कीमत के दिये गये मिश्रित मान में से, क्रमशः, मँहगी और सस्ती वस्तुओं के मूल्यों के
संख्यात्मक मानों को निकालने के लिये नियम —
( दी गई वस्तुओं की दर-राशियों को ) उनकी दर-कीमतों द्वारा भाजित करो । ( इन परिणामी
राशियों को अलग-अलग ) उनमें से अल्पतम राशि द्वारा हासित करो । तब ( उपर्युक्त भजनफल
राशियों में से ) अल्पतम राशि द्वारा सब वस्तुओं की मिश्रित कीमत को गुणित करो; और ( इस
गुणनफल को ) विभिन्न वस्तुओं की कुल संख्या में से घटाओ । तब ( इस शेष को मन से ) उतने
भागों में विभक्त करो ( जितने कि घटाने के पश्चात् बचे हुए उपर्युक्त भजनफलों के शेष होते हैं ) ।
और तब, ( इन भागों को उन भजनफल राशियों के शेषों द्वारा ) भाजित करो । इस प्रकार, विभिन्न
सस्ती वस्तुओं की कीमतें प्राप्त होती हैं । इन्हें कुल कीमत से अलग करनेपर खरीदी हुई महँगी
वस्तु की कीमत प्राप्त होती है ॥१४६½॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
“२ पण में ३ मोर, ३ पण में ४ कबूतर, ४ पण में ५ हंस, और ५ पण में ६ सारस की दरों
के अनुसार, हे मित्र, ५६ पण के ७२ पक्षी खरीद कर मेरे पास लाओ ।” ऐसा कहकर एक मनुष्य
ने खरीद की कीमत ( अपने मित्र को ) दे दी । शीघ्र गणना करके बतलाओ कि कितने पणों में
उसने प्रत्येक प्रकार के कितने पक्षी खरीदे ॥ १४७½-१४९ ॥ ३ पण में ५ पल शुण्ठि, ४ पण में
(४) को ( क - श ) से विभाजित करने पर हमें भजनफल अ प्राप्त होता है, और शेष
ब ( ख - श ) + स ( ग - श ) प्राप्त होता है, जहाँ क - श उपयुक्त पूर्णांक है । इसी प्रकार, हम यह
क्रिया अंत तक ले जाते हैं ।
इस प्रकार, यह देखने में आता है कि उत्तरोत्तर चुने गये भाजक क - श, ख - श और ग - श,
जब श में मिलाये जाते हैं, तब वे विभिन्न कीमतों के मान को उत्पन्न करते हैं, प्रथम वस्तु की कीमत श
ही होती है, और यह कि उत्तरोत्तर भजनफल अ, ब, स और साथ ही न - ( अ + ब + स ) विभिन्न
प्रकारों की वस्तुओं के मान हैं । इस नियम में, दी गई वस्तुओं के प्रकारों की संख्या से एक कम संख्या
के विभाजन किये जाते हैं । अंतिम भाजन में कोई भी शेष नहीं बचना चाहिए ।
( १४६½ ) अगली गाथा ( १४७½-१४९ ) में दिये गये प्रश्न को साधन करने पर नियम स्पष्ट
हो जावेगा — दर-राशियां ३, ४, ५, ६ को क्रमवार दर-कीमतों २, ३, ४, ५ द्वारा विभाजित करते
हैं । इस प्रकार हमें ३/२, ४/३, ५/४, ६/५ प्राप्त होते हैं । इनमें से अल्पतम ६/५ को अन्य तीन में से अलग-
ग० सा० सं०-१७