सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 421 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 171

An elegant, line-by-line transcription of the page in pure Unicode Devanagari is provided below.


-६. ११५३] मिश्रकव्यवहारः [ ११७
के मिश्रित प्रश्न के हल के लिये इष्ट लता समान अंकों की शृङ्खला प्राप्त की जाती है । यह शृङ्खला
पहिले की भाँति नीचे से ऊपर की ओर बर्त्ती जाती है और, पहिले की तरह, परिणामी संख्या को इस
इसी तरह, प₂ = (र₂ प₃ - ब) / र₃ = फ४ प₃ + प४, जहाँ प४ = (र४ प₃ - ब) / र₃ है ; प₃ = (र₃ प४ + ब) / र४
= फ५ प४ + प५, जहाँ प५ = (र५ प४ + ब) / र४ है । इस प्रकार हमें निम्नलिखित सम्बन्ध प्राप्त होते हैं -
क = फ₂ प₁ + प₂ ; प₁ = फ₃ प₂ + प₃ ; प₂ = फ४ प₃ + प४ ; प₃ = फ५ प४ + प५ ;
प४ का मान इस तरह चुनते हैं ताकि (र५ प४ + ब) / र४ ( जो कि ऊपर बतलाए अनुसार प५ का मान
है ), एक पूर्णांक बन जावे । इस प्रकार, शृंखला फ₂, फ₃, फ४, प