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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 165, कुल 421 में से

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पृष्ठ 165

[-६. १०१½ ] मिश्रकव्यवहारः [ १११

इष्टरूपाधिकहीनप्रक्षेपककरणसूत्रम्—
पिण्डोऽधिकरूपोनो हीनोत्तररूपसंयुतः शेषात् । प्रक्षेपककरणमतः कर्तव्यं तैर्युता हीनाः ॥ ९७½॥
अत्रोद्देशकः
प्रथमस्यैकांशोऽतो द्विगुणद्विगुणोत्तराद्भजन्ति नराः ।
चत्वारोऽशः कः स्यादेकस्य हि सप्तषष्टिरिह ॥ ९८½ ॥
प्रथमाद्ध्यर्धगुणात् त्रिगुणाद्रूपोत्तराद्विभाज्यन्ते ।
साष्टा सप्ततिरेभिश्चतुर्भीरांशकान् ब्रूहि ॥ ९९½ ॥
प्रथमाद्ध्यर्धगुणाः पञ्चार्धगुणोत्तराणि रूपाणि । पञ्चानां पञ्चाशत्सैका चरणत्रयाभ्यधिका॥१००½॥
प्रथमात्पञ्चार्धगुणारचतुर्गुणोत्तरविहीनभागेन ।
भक्तं नरैश्चतुर्भिः पञ्चदशोनं शतचतुष्कम् ॥ १०१½ ॥

समानुपाती भाग सम्बन्धी नियम, जहाँ मन से चुनी हुई कुछ पूर्णांक राशियों को जोड़ना अथवा घटाना होता है—

दी गई कुल राशि को जोड़ी जाने वाली पूर्णांक राशियों द्वारा ह्रासित किया जाता है, अथवा घटाई जानेवाली पूर्णांक धनात्मक राशियों में मिलाया जाता है । तब इस परिणामी राशि की सहायता से समानुपाती भाग की क्रिया की जाती है, और परिणामी समानुपाती भागों को क्रमशः उनमें जोड़ी जानेवाली पूर्णांक राशियों से मिला दिया जाता है; अथवा, वे उन घटाई जानेवाली पूर्णांक राशियों द्वारा क्रमशः ह्रासित की जाती हैं ॥ ९७½ ॥

उदाहरणार्थ प्रश्न

चार मनुष्यों ने उत्तरोत्तर द्विगुणित समानुपाती भागों में और उत्तरोत्तर द्विगुणित अन्तरों वाले योग में अपने हिस्सों को प्राप्त किया । प्रथम मनुष्य को एक हिस्सा मिला । ६७ बाँटी जाने वाली राशि है । प्रत्येक के हिस्से क्या हैं ? ॥ ९८½ ॥ ७८ की रकम इन चार मनुष्यों में ऐसे समानुपाती भागों में वितरित की जाती है जो उत्तरोत्तर प्रथम से आरम्भ होकर प्रत्येक पूर्ववर्ती से १½ गुणे हैं और ( योग में ) जिनका अन्तर एक से आरम्भ होकर तिगुना वृद्धि रूप है । प्रत्येक के द्वारा प्राप्त भागों के मान बतलाओ । ॥ ९९½ ॥ पाँच मनुष्यों के हिस्से क्रमिकरूपेण प्रथम से आरम्भ होकर प्रत्येक पूर्ववर्ती से १½ गुने हैं, और योग में अन्तर की राशियाँ वे हैं जो उत्तरोत्तर ( पूर्ववर्ती अन्तर ) से २½ गुणी हैं । ५१¾ विभाजित की जाने वाली कुल राशि है । प्रत्येक के द्वारा प्राप्त भागों के मान बतलाओ ॥ १००½ ॥ ४०० ऋण १५ को चार मनुष्यों के बीच ऐसे भागों में विभाजित किया जाता है जो पहिले से आरम्भ होकर प्रत्येक पूर्ववर्ती से २½ गुणे हैं, और जो उन अंतरों द्वारा ह्रासित हैं जो उत्तरोत्तर पूर्ववर्ती अंतर से ४ गुने हैं । विभिन्न भागों के मानों के प्राप्त करो ॥१०१½॥


(९७½) समानुपाती भाग की क्रिया यहाँ ८७½ से ८९½ में दिये गये नियमों में से किसी भी एक के अनुसार की जा सकती है ।

( ९८½ ) हिस्सों में जोड़ी जानेवाली अंतर राशि यहाँ १ है जो दूसरे मनुष्य के संबंध में है । यह दो शेष मनुष्यों में से प्रत्येक के लिये पूर्ववर्ती अंतर की दुगुनी है । यह अंतर दूसरे मनुष्य के लिये स्पष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है जैसा कि इस उदाहरण में १ उल्लिखित है । १००½ वीं गाथा और १०१½ वीं गाथा के उदाहरण में भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है ।