गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
पृष्ठ 164, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ें११० ] गणितसारसंग्रहः [ ६. ९०½-
अत्रोद्देशकः
द्वाभ्यां त्रीणि त्रिभिः पञ्च पञ्चभिः सप्त मानकैः ।
दाडिमाम्रकपित्थानां फलानि गणितार्थवित् ॥ ९०½ ॥
कपित्थात् त्रिगुणं ह्याम्रं दाडिमं षड्गुणं भवेत् ।
क्रीत्वानय सखे शीघ्रं त्वं षट्सप्ततिभिः पणैः ॥ ९१½ ॥
दध्याज्यक्षीरघटैर्जिनबिम्बस्याभिषेचनं कृतवान् ।
जिनपुरुषो द्वासप्ततिपलैस्त्रयः पूरिताः कलशाः ॥ ९२½ ॥
द्वात्रिंशत्प्रथमघटे पुनश्चतुर्विंशतिर्द्वितीयघटे ।
षोडश तृतीयकलशे पृथक् पृथक् कथय मे कृत्वा ॥ ९३½ ॥
तेषां दधिघृतपयसां ततश्चतुर्विंशतिर्घृतस्य पलानि ।
षोडश पयःपलानि द्वात्रिंशद् दधिपलानीह ॥ ९४½ ॥
वृत्तिस्त्रयः पुराणाः पुंसश्चारोहकस्य तत्रापि । सर्वेऽपि पञ्चषष्टिः केचिद्भग्ना धनं तेषाम् ॥ ९५½ ॥
संनिहितानां दत्तं लब्धं पुंसा दशैव चैकस्य ।
के संनिहिता भग्नाः के मम संचिन्त्य कथय त्वम् ॥ ९६½ ॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
अनार, आम और कपित्थ क्रमशः २ पण में ३, ३ पण में ५ और ५ पण में ७ की दर से प्राप्य
हैं। हे गणना के सिद्धांतों को जानने वाले मित्र ! ७६ पणों के फल लेकर शीघ्र आओ ताकि आमों की
संख्या कपित्थों की संख्या की तिगुनी हो और अनारों की संख्या ६ गुनी हो ॥ ९०½-९१½ ॥ किसी
जिनानुगामी ने जिन प्रतिमा का दही, घी और दुग्ध से पूरित कलशों द्वारा अभिषेक कराया ।
इनके ७२ पलों द्वारा ३ पात्र भर गये । प्रथम घट में ३२ पल, दूसरे घट में २४ तथा तीसरे में १६
पल पाये गये । इन दधि, घी, दूध मिश्रित पात्रों में मिश्रित द्रव्यों को अलग-अलग ज्ञात और प्राप्त
करो जबकि कुल मिलाकर २४ पल घी, १६ पल दूध और ३२ पल दही है ॥ ९२½-९४½ ॥
एक अश्वारोही सैनिक का वेतन ३ पुराण था । इस दर पर कुल ६५ व्यक्ति नियुक्त थे । उनमें से कुछ
मारे गये और उनके वेतन की रकम रणक्षेत्र में शेष रहनेवाले सैनिकों को दे दी गई । इस प्रकार,
प्रत्येक मनुष्य को १० पुराण प्राप्त हुए । मुझे बतलाओ कि रणक्षेत्र में कितने सैनिक खेत रहे और
कितने जीवित बचे ? ॥ ९५½-९६½ ॥
करते हैं । इस प्रकार हमें २/३ × ६, २/३ × ३, २/३ × १ से क्रमशः ४, २ और २/३ प्राप्त होते हैं । ये समानुपाती
भाग हैं । ८८½ और ८९½ सूत्रों में इन समानुपाती भागों के संबंध में प्रक्षेप की क्रिया का प्रयोग करना
पड़ता है । परन्तु, ८७½ करण नियम में यह क्रिया पूरी तरह वर्णित है ।