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सर्वकोश
गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)

Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation

महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा

DevanagariHindipublished421 पृष्ठ

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पृष्ठ 121

-३. १४० ] कलासवर्णव्यवहारः [ ६७

अत्रोद्देशकः

ड्यंशः पादोऽर्धोर्धं पञ्चमषष्ठत्रिपादहृतमेकम् ।
पञ्चार्धहृतं रूपं सषष्ठमेकं सपञ्चमं रूपम् ॥१३९॥
स्वीयतृतीययुग्दलम्तो निजषष्ठयुतो द्विसप्तमो
हीननवांशमेकमपनीतदशांशकरूपमष्टमः ।
स्वेन नवांशकेन रहितश्चरणः स्वकपञ्चमोज्झितो
ब्रूहि समस्य तान् प्रिय कलासमकोत्पलमालिकाविधौ ॥१४०॥
इति भागमातृजातिः ।
इति सारसङ्ग्रहे गणितशास्त्रे महावीराचार्यस्य कृतौ कलासवर्णो नाम द्वितीयव्यवहारस्समाप्तः ॥


उदाहरणार्थ प्रश्न

दिया गया है कि भिन्न २/३, १/४, १/२ का १/२, १/५ का १/६; १ / (३/४) , १ / (५/२) ; १ १/६, १ १/५; १/२ अपने १/३ भाग
से संयुक्त है; पुनः