गणितसारसंग्रह (महावीराचार्य - प्रो. लक्ष्मीचन्द्र जैन सविस्तार हिन्दी अनुवाद सटीक)
Ganitasarasangraha of Mahaviracharya with Hindi Translation
महावीराचार्य (अनुवादक: प्रो. एल. सी. जैन) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६६ ] गणितसारसंग्रहः [ ३. १३७-
अत्रोद्देशकः
कश्चिदंशोऽशकैः कैश्चित्पञ्चभिः स्वैर्युतो दलम् ।
वियुक्तो वा भवेत्पादस्तानंशान् कथय प्रिय ॥१३७॥
भागमातृजातौ सूत्रम्—
भागादिमजातीनां स्वस्वविधिर्भागमातृजातौ स्यात् ।
सा षड्विंशतिभेदा रूपं छेदोऽच्छिदो राशेः ॥१३८॥
उदाहरणार्थ प्रश्न
एक भिन्न निज के पाँच अन्य भिन्नों से मिलाया जाने पर १/२ हो जाता है; और, एक अन्य
भिन्न निज के पाँच अन्य भिन्नों द्वारा ह्रासित होकर १/४ हो जाता है । हे मित्र ! उन सब अज्ञात भिन्नों
का मान निकालो ॥१३७॥
भागमातृ जाति [ दो या अधिक प्रकार के भिन्नों से संयुक्त भिन्न ]
ऊपर वर्णित सभी प्रकार के भिन्नों का जिसमें समावेश है ऐसे भागमातृ प्रकार के भिन्न सरल
करने के लिये नियम—
भागमातृ भिन्नों में, सरल भिन्नों को आदि लेकर विभिन्न प्रकार के भिन्नों सम्बन्धी नियम
प्रयोज्य होते हैं । भागमातृ भिन्न के २६ प्रकार होते हैं । जिस राशि का हर नहीं होता उस राशि का
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