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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 96

भाषाटीकासमेत । ( ९५ )
हे राजन् ! जो मुझमें एक संग अपना मन न लगासको
तो अभ्यासयोगसे मुझे प्राप्त होनेका यत्न करो ॥ ११ ॥
तत्रापि त्वमशक्तश्चेत्कुरु कर्म मदर्पणम् ॥
ममानुग्रहतश्चैवं परां निर्वृतिमेष्यसि ॥ १२ ॥
और जो यहभी न हो सके तो जो कुछ कर्म करो सो मेरे
अर्पण करो, मेरी कृपासेही परम शान्तिको प्राप्त होगे ॥१२॥
अथैतदप्यनुष्ठातुं न शक्तोऽसि तदा कुरु ॥
प्रयत्नतःफलत्यागं त्रिविधानां हि कर्मणाम् १३
और जो यहभी अनुष्ठान न करसको तो यत्नपूर्वक तीनों
प्रकारके कर्मोंका फल त्यागन करो ॥ १३ ॥
श्रेयसी बुद्धिरावृत्तेस्ततो ध्यानं परं मतम् ॥
ततोऽखिलपरित्यागस्ततःशान्तिर्गरीयसी १४॥
प्रथम मेरेमें बुद्धि लगनी श्रेष्ठ है,उससे ध्यान श्रेष्ठ है,उससे
सम्पूर्ण कर्मोंका त्याग श्रेष्ठ है, इससे अत्यन्त श्रेष्ठ शान्ति
प्राप्त होती है ॥ १४ ॥
निरहंममताबुद्धिरद्वेषः करुणासमः ॥
लाभालाभे सुखेदुःखे मानामाने समे प्रियः १५