गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८ ) गणेशगीता-अ० १.
नाम योग नहीं, इंद्रिय सम्पन्न होनेका नाम योग
नहीं है ॥ ७ ॥
योगो यः पितृमात्रादेर्न स योगो नराधिप ॥
यो योगो बन्धुपुत्रादेर्यश्चाष्टभूतिभिः सह ॥८॥
हे राजन् ! माता पिताके समागमका नाम योग नही,
आठ प्रकारकी सिद्धि और बंधुपुत्रादिकी प्राप्तिका नामभी
योग नहीं है ॥ ८ ॥
न स योगः स्त्रिया योगो जगदद्भुतरूपया ॥
राज्ययोगश्च नो योगो न योगो गजवाजिभिः९॥
अत्यन्त रूपवती स्त्रीकी प्राप्तिका नाम योग नहीं है,
राज्यकी प्राप्ति तथा हाथी घोडेकी प्राप्तिका नाम योग
नहीं है ॥ ९ ॥
योगो नेन्द्रपदस्यापि योगो योगार्थिनः प्रियः॥
योगो यःसत्यलोकस्य न स योगो मतो मम १० .
इन्द्रपदकी प्राप्तिका नाम योग नहीं है, योगद्वारा प्रिय
सिद्धिकी इच्छा करनेका नाम योग नहीं है, सत्यलोककी
प्राप्तिकोभी मैं योग नहीं मानता ॥ १० ॥