गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत। ( ९ )
शैवस्य योगो नो योगो वैष्णवस्य पदस्य यः ॥
न योगो भूप सूर्य्यत्वं चन्द्रत्वंन कुबेरता ॥११॥
शिवपदकी प्राप्तिहोनी, वैष्णवपदकी प्राप्तिहोनी उसका भी
नाम योग नहीं, हे राजन् ! सूर्य चंद्र और कुबेरके पदकी
प्राप्ति होनेकाभी नाम योग नहीं ॥ ११ ॥
नानिलत्वं नानलत्वं नामरत्वं न कालता ॥
न वारुण्यं न नैर्ऋत्यं योगो न सार्वभौमता ॥१२॥
वायुस्वरूप, अग्निस্বরূপ, देवस्वरूप, कालस्वरूप, वरुणस्व-
रूप, निर्ऋतिस्वरूप, सम्पूर्ण पृथ्वीके राजपानेका नाम भी
योग नहीं है ॥ १२ ॥
योगं नानाविधं भूप युञ्जन्ति ज्ञानिनस्ततम् ॥
भवंति वितृषा लोके जिताहारा विरेतसः ॥१३॥
हे राजन् ! योग अनेक प्रकारका है, परन्तु योग वही है,
जिसको प्राप्त होकर ज्ञानी लोग संसारसे विरक्त होते हैं
तथा आहार जीतकर इच्छा रहित होते हैं ॥ १३ ॥
पावयन्त्यखिलांल्लोकान्वशीकृतजगत्त्रयाः ॥
करुणापूर्णहृदया बोधयन्त्यपि कांश्चन ॥१४॥