गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (७)
राजाके पूछनेपर सम्पूर्ण विघ्नोंके नाशक गणेशजीने
कहाथा ॥ ४ ॥
वरेण्य उवाच ।
विघ्नेश्वर महाबाहो सर्वविद्याविशारद ॥
सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञ योगं मे वक्तुमर्हसि ॥५॥
वरेण्य राजा बोला कि हे विघ्न दूर करने हारे ! हे महा-
भुज ! हे सर्व विद्याओंके पंडित ! हे संपूर्ण शास्त्रके तत्त्वको
जानने वाले, आप मुझसे योगमार्गका वर्णन कीजिये ॥ ५ ॥
श्रीगजानन उवाच ॥
सम्यग्व्यवसिता राजन्मतिस्तेऽनुग्रहान्मम ॥
शृणु गीतां प्रवक्ष्यामि योगामृतमयीं नृप ॥६॥
श्रीभगवान् बोले. राजन्! मेरी कृपासे तुम्हारी बुद्धि निर्मल
और शास्त्रको ग्रहण करनेवाली है, सुनो मैं योगाऽमृत गीता
तुमसे कहताहूं ॥ ६ ॥
न योगं योगमित्याहुर्योगो योगो न च श्रियः॥
न योगो विषयैर्योगो न च मात्रादिभिस्तथा॥७॥
‘योग” इस शब्दकाही नाम योग नहीं, लक्ष्मीकी
प्राप्ति होनेका नाम योग नहीं, विषय सुखकी प्राप्ति होनेका