गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)
Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary
भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ८६ ) गणेशगीता-अ० ८.
असंख्य नेत्र, करोडों सूर्यकी किरणोंकी समान प्रकाशीत
आयुध धारण किये, इस प्रकार उनके शरीरमें एक स्थानमें
राजाने तीनोंलोक देखे ॥ ७ ॥
वरेण्य उवाच ।
दृष्ट्वैश्र्वरं परं रूपं प्रणम्य स नृपोऽब्रवीत् ॥
वीक्षेऽहं तव देहेऽस्मिन्देवानृषिगणान्पितॄन् ॥८॥
यह ईश्वरसम्बन्धी परम रूप देख प्रणाम करके राजा
( वरेण्य ) बोला-हे भगवन् ! मैं आपके इस देहमें देवता
ऋषियोंके गण और पितरोंको देखता हूं ॥ ८ ॥
पातालानां समुद्राणां द्वीपानां चैव भूभृताम् ॥
महर्षीणां सप्तकं च नानार्थैः संकुलं विभो ॥९॥
हे विभो ! सात पाताल, सात समुद्र, सात द्वीप,सात पर्वत,
सात ऋषि, यह सब अनेक अर्थोंसे युक्त देखता हूं ॥ ९ ॥
भुवोऽन्तरिक्षं स्वर्गांश्च मनुष्योरगराक्षसान् ॥
ब्रह्मविष्णुमहेशेन्द्रान्देवाअन्तूननेकधा ॥ १० ॥
पृथ्वी, अन्तरिक्ष, स्वर्ग, मनुष्य, सर्प, राक्षस, ब्रह्मा, विष्णु,
महेश, इन्द्र,देवता और भी अनेकप्रकारके जन्तु देखता हूं १०॥