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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 12

भाषाटीकासमेत । ( ११ )
दयापूर्ण हृदय होकर पृथ्वीमें भ्रमण करते हैं, क्रोधको
जीते जितेन्द्रिय हुए, लोकोंपर अनुग्रह करनेको विचरते हैं १८
देहमात्रभृतो भूप समलोष्टाश्मकाञ्चनाः ॥
एतादृशा महाभाग्याःस्युश्चक्षुर्गोचराःप्रिय॥१९॥
हे राजन् ! वे केवल देहमात्रकोही धारण करनेहारे, मिट्टी,
पत्थर सुवर्णमें समान दृष्टि करनेवाले, इस प्रकारके महाभाग
पुरुष जिस योगके द्वारा दृष्टिगोचर होजाते हैं ॥ १९ ॥
तमिदानीमहं वक्ष्ये शृणु योगमनुत्तमम् ॥
श्रुत्वा यं मुच्यते जन्तुःपापेभ्यो भवसागरात् २०
उस श्रेष्ठ योगको मैं तुमसे इस समय कहता हूं जिसके
श्रवण करनेसे यह प्राणी पापोंसे और भवसागरसे पार हो
जाता है ॥ २० ॥
शिवे विष्णौ च शक्तौ च सूर्ये मयि नराधिप॥
याऽभेदबुद्धिर्योगःस सम्यग्योगो मतो मम २१॥
हे राजन् ! शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और मुझमें जो ,अभेद
बुद्धि करनी है उसीका नाम मैं यथार्थ योग मानताहूं ॥२१॥
अहमेव जगद्यस्मात्सृजामि पालयामि च ॥
कृत्वा नानाविधं वेषं संहरामि स्वलीलया २२॥