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सर्वकोश
गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

गणेश गीता (गणेश पुराण क्रीड़ाखण्ड - राजा वरेण्य-गजानन संवाद सटीक)

Ganesha Gita from Ganesha Purana with Hindi Commentary

भगवान् गणेश / महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished130 पृष्ठ

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पृष्ठ 13

( १२ ) गणेशगीता-अ० १.
मैंही इस जगत्की उत्पत्ति पालन और संहार अपनी
लीलासेही अनेक वेषधारणपूर्वक करताहूं ॥ २२ ॥
अहमेव महाविष्णुरहमेव सदाशिवः ॥
अहमेव महाशक्तिरहमेवार्यमा प्रिय ॥ २३ ॥
मैंही महाविष्णु, मैंही सदाशिव, मैंही महाशक्ति और
मैंही सूर्य और यम हूं ॥ २३ ॥
अहमेको नृणां नाथो जातः पञ्चविधः पुरा ॥
अज्ञानान्मां न जानन्ति जगत्कारणकारणम् २४
मैंही एक मनुष्योंका स्वामी, इन पांच प्रकारसे पूर्वकालमें
उत्पन्न हुआहूं, मैं जगत्की कारण मायाका भी कारणहूं
मुझको अज्ञानी लोग नहीं जानते ॥ २४ ॥
मत्तोऽग्निरापो धरणी मत्त आकाशमारुतौ ॥
ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च लोकपाला दिशो दश२५॥
मुझहीसे अग्नि जल आकाश धरणी पवन ब्रह्मा विष्णु रुद्र
लोकपाल दशों दिशा उत्पन्न हुई हैं ॥ २५ ॥
वसवो मुनयो गावो मनवः पशवोऽपि च ॥
सरितः सागरा यक्षा वृक्षाः पक्षिगणा अपि२६॥