श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre
सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतीसवाँ अध्याय ८१५
महापानाभिमत्तानां वीराणां दृप्तचेतसाम्।
कृष्णमायाविमूढानां संघर्षः सुमहानभूत्॥ १३॥
पहले के अंतरंग मित्र थे लेकिन मद्यपान से मदोन्मत्त होकर अत्यन्त गर्व से एक-दूसरे की निन्दा करने
लगे। कृष्णमाया ने उनका ज्ञान नष्ट कर दिया, इससे सभी की बुद्धि मंद हो गयी। उन्होंने आत्मीयता का सम्बन्ध
तोड़कर युद्ध ही प्रारम्भ कर दिया। एक-दूसरे को बुरा-भला कहने से दोनों में ही क्रोध जगा और वे हाथ में
शस्त्र लेकर आपस में लड़ने लगे।
युयुधुः क्रोधसंरब्धा वेलायामाततायिनः।
धनुर्भिरसिभिर्भल्लैर्गदाभिस्तोमरर्ष्टिभिः ॥ १४॥
क्रोध से आँखें लाल करते हुए उन्होंने तत्काल शस्त्र निकाल लिये और वे महान वीर समुद्र तट पर घनघोर
युद्ध करने के लिये उद्यत हो गये। धनुष्य की प्रत्यंचा खींच कर एक-दूसरे पर बाणों की वर्षा करने लगे। अपने
ही आत्मीय-स्वजनों के प्राण लेने के लिये तलवार से एक-दूसरे पर प्रहार करने लगे। कोई भाला उठाकर एक-
दूसरे पर मार करने लगे तो कोई जोर-