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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

पृष्ठ 782, कुल 869 में से

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७६६ श्रीमद् एकनाथी भागवत
सीता पर अत्यन्त कृपा होने के कारण रामचन्द्र ने सेतु का निर्माण किया। उस पर से जंगली और मूढ वानर भी
उस पार चले गये। उसी प्रकार उद्धव के प्रश्न के प्रति प्रेम के कारण अपनी भक्ति के उपाय का भवाब्धि सेतु
श्रीकृष्ण ने बनाया। उस पर से दीन, दुर्बल और भाविक लोग सहज ही उस पार चले जायेंगे। कृष्णभक्ति के सेतु
पर चलकर जड़, मूढ़ पामर सब तर कर चले गये। वही भक्ति यादवेन्द्र श्रीकृष्ण बतायेंगे, उसे श्रोतागण
आदरयुक्त चित्त से सुनें। एका जनार्दन की शरण में होने के कारण श्रोता भी प्रसन्न हो उठे हैं। इस प्रकार अगले
अध्याय के निरूपण से साधक लोग तर जाएँगे। अपना एकपन त्याग कर एका जनार्दन की शरण में है। अब
जिससे आत्मज्ञान सुगम रीति से समझ में आ सके वह भक्तिसाधन श्रीकृष्ण बता रहे हैं।
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे एकादशस्कंधेभगवदुद्धवसंवादेपारमहंससंहितायां
एकाकार टीकायां परमार्थ निर्णयोनाम अष्ट विशंतितमोऽध्यायः॥ २८ ॥
श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥