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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

पृष्ठ 750, कुल 869 में से

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७३४ श्रीमद् एकनाथी भागवत
वह कथा कान में पहुँचते ही जीव को स्वयंभू सुख प्राप्त होगा और भीतर-बाहर वह भर जाएगा। जिस कथा की
माधुरी प्राण जाने पर भी नहीं छूट सकेगी, ऐसा रसमय निरूपण श्रीकृष्ण उद्धव को सुनायेंगे। उसे सुनते ही
ब्रह्मभाव उत्पन्न होगा। यह अट्ठाइसवाँ अध्याय ब्रह्मसुख की संचित निधि है, यह ध्यान रखो। इसकी सूक्ष्म से
सूक्ष्म बात श्रीकृष्ण उद्धव को स्पष्ट करके बतायेंगे। यह कृष्ण-उद्धव का आत्मज्ञान है। एकनाथ जनार्दन की
शरण में जाकर बिनती करता है कि आपकी पूर्ण कृपा से श्रोतागण इधर मेरी ओर ध्यान दें। श्रोताओं के ध्यान देने
से ग्रन्थ के निरूपण का उल्हास बढ़ता है। इसलिये एकनाथ जनार्दन की शरण जाकर उनके चरणों का वन्दन कर
रहा है।
इति श्रीमद्भागवते महापुराणे एकादशस्कंधे श्रीकृष्णोद्धव संवादे एकाकार टीकायां
प्रकृति पुरुष सांख्य योग नाम सप्तविंशोऽध्यायः ॥ २६ ॥
श्रीकृष्णार्पणमस्तु ॥