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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

पृष्ठ 307, कुल 869 में से

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पृष्ठ 307

ग्यारहवाँ अध्याय २९१
हूँ' तो फिर तुम्हें गण, नाम तथा कर्म किस बात का ? और कीर्तन धर्म भी कैसे होगा ? लेकिन उद्धव ! तुम ऐसी
बात मन में न लाओ। मैं अपनी ही माया के सहारे अपनी अनेक लीलाएँ दिखाता हूँ, अनेक अवतार धारण करता
हूँ और बिना कुछ किये ही सबका पालन और संहार करता हूँ। ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर ये त्रिगुणात्मक तीन
गुणावतार हैं, लेकिन उन तीनों रूपों में सचमुच मैं ही रहता हूँ, मैं ही चराचर का निर्माण करता हूँ और उनका
संहार भी करता हूँ। ब्रह्मदेव के रूप में सृष्टि को उत्पन्न करने वाला भी मैं, विष्णु के रूप में उसका प्रतिपाल
करनेवाला भी मैं और रुद्ररूप से उसका संहार करने वाला भी मैं ही हूँ यह समझ लो। जिस प्रकार बाल्य, यौवन
तथा वार्धक्य इन तीनों अवस्थाओं का कर्त्ता एक ही पुरुष होता है, उसी प्रकार उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय इन
तीन कर्मों का कर्त्ता मैं ही हूँ। 'मैं' कर्त्ता होते हुए अकर्त्ता हूँ और अकर्त्ता के रूप में कर्त्ता हूँ। मेरी यह बात स्वयं
मैं ही जानता हूँ, दूसरा नहीं जानता। मेरे नाम और कर्मों का वर्णन करने से उस वक्ता को मेरी ही उपाधि प्राप्त
होती है और मेरी लीलावतारों का कीर्तन किया जाय तो कीर्तनकार को आत्मप्राप्ति होती है। सारे अवतारों में
श्रेष्ठ श्रीराम, श्रीकृष्ण आदि के जन्मकर्म, उनके विविध चरित्र तथा लीलाएँ इनका जो अखण्ड गायन करते हैं
उन्हें आत्मप्राप्ति होती है। श्रीराम ने सहज लीला के रूप में सेतु का निर्माण किया तथा समुद्र में पत्थरों को तैरने
के लिये बाध्य किया, श्रीकृष्ण ने खेल ही खेल में गोवर्धन पर्वत उठा लिया और दावाग्नि को निगल लिया,
श्रीराम ने एक ही बाण से ताड़का का वध किया, श्रीकृष्ण ने बाल्यावस्था में ही पूतना का स्तन चूस कर उसे मार
डाला। श्रीराम ने पैर से अहिल्या का उद्धार किया, श्रीकृष्ण ने यमलार्जुन दोनों का ही उद्धार किया। जिस धनुष
को उठाने में रावण भी लड़खड़ा कर गिर पड़ा वही धनुष तोड़कर श्रीराम ने सीता का वरण किया, श्रीकृष्ण
शिशुपाल आदि को जीत कर भीमकराजा की कन्या रुक्मिणी को घर ले आये। श्रीराम ने सुबाहु, खर, दूषण
आदि का वध किया, श्रीकृष्ण ने अधासुर, बकासुर, केशी आदि को मारा। श्रीराम ने सुग्रीव को राजपाट देकर
उसकी सिंहासन पर स्थापना की। उसी प्रकार श्रीकृष्ण ने उग्रसेन को सिंहासन पर बिठाया। श्रीराम ने वानर सेना
एकत्र कर राक्षसकुल का वध किया श्रीकृष्ण ने बालगोपाल इकट्ठा कर सारे मल्लों को मार डाला। श्रीराम ने
रावण और कुम्भकर्ण को मारा, श्रीकृष्ण ने कंस और चाणूर का वध किया। श्रीराम ने बालि नामक वानर को
धोखा दिया, श्रीकृष्ण ने महाघोर कालयवन को ठगा। श्रीराम ने राज्य पर विभीषण को स्थापित किया, श्रीकृष्ण ने
राज्य पर धर्म की स्थापित की। एक बाप की आज्ञा से वनवास पर गया तो दूसरा माता के मृतपुत्रों को लेकर
आया। इन अवतारों का चरित्र वर्णन कर ही पहले चोर रहा कोली महान ऋषि वाल्मीकि बना और व्यास जाटपुत्र
होते हुए व्यास अवतार चरित्रों का गायन करने से ही त्रिभुवन में श्रेष्ठ कहलाये। इन दोनों अवतारों की महानता
का वर्णन करते-करते ही दोनों महान कवि हो गये। देवताओं ने भी स्तुतिस्तोत्रों का गायन तथा वन्दन कर व्यास-
वाल्मीकि को गौरवान्वित किया है। उन महाकवियों की काव्यकथा शेष नेत्रद्वार से श्रवण करते-करते तथा दो
सहस्र नेत्रों से सुनने पर भी उसका मन नहीं भरता। यही कथा सुनने के लिये स्वर्ग में इन्द्र ने बृहस्पति का
चरणस्पर्श किया। इस प्रकार सारे त्रिभुवन में इन अवतारों की चरित्रकथा की. कीर्ति फैली हुई है। कथा महिमा
का वर्णन अब बन्द करता हूँ। लेकिन केवल मेरे नाम का स्मरण करने से ही मैंने अजामिल ब्राह्मण का उद्धार
किया। हरिनाम स्मरण से ही गजेन्द्र का उद्धार हुआ। पक्षी को नाम लेने के बहाने राम इन दो अक्षरों का स्मरण
किया लेकिन केवल उतने से ही महापापी वेश्या का उद्धार हो गया। वेदशास्त्रों का अर्थ जानना कठिन है किन्तु
मेरा नाम कठिन नहीं है यह ध्यान में रखो पठन करने से वेदशास्त्र पढ़ सकते हैं लेकिन केवल उतने से ही मुझमें
प्रवेश नहीं हो पाता। लेकिन कोई सहज ही मेरा नाम ले ले तो वह मुझे अच्छा लगता है। वेदशास्त्रों के अधिकारी