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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

पृष्ठ 230, कुल 869 में से

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२१४ श्रीमद् एकनाथी भागवत
एक कुमारिका थी। उसे घर में छोड़कर उसके माँ-बाप अपने इष्ट मित्रों के साथ कुलस्वामी की यात्रा पर
गये। उन्होंने उस कन्या के विवाह का विचार पहले से ही कर रखा था। वही सम्बन्ध निश्चित करने के लिये
वरपक्ष की ओर से श्रेष्ठ ब्राह्मण उनके घर आये। उन्होंने पूछा, "घर में कौन है?" लेकिन भावी वधू ने लज्जा
के कारण मौन रखा लेकिन उनके स्वागत की पूरी तैयारी की। खिड़की में से ही सबको बैठने के लिये आसन
दिये। गंधाक्षत, फूल, पान आदि सामग्री बिना माँगे ही लाकर धर दी। पूजा की सारी सामग्री सामने देखकर
ब्राह्मण समझ गये कि वधू घर में अकेली है और उसकी ही यह चातुरी है। उसे उनके मेहमाननवाजी की चिन्ता
पड़ गयी। वह मन ही मन बोली, "मेरी माँ को आने में विलम्ब होगा और घर में तो चावल भी कूटे हुए नहीं
हैं। चावल कूटने में तो भोजन में विलम्ब हो जायेगा।"
तेषामभ्यवहारार्थं, शालीन रहसि पार्थिव।
अवघ्नन्त्याः प्रकोष्ठस्थाश्चक्रुः शङ्खाः स्वनं महत्॥ ६॥
ऐसा विचार मन में करते हुए वह चावल कूटने लगी