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सर्वकोश
श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

श्रीमद् एकनाथी भागवत (सन्त एकनाथ - श्रीमद्भागवत एकादश स्कन्ध उद्धव गीता सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Shrimad Eknathi Bhagavat (Hindi) by N.V. Sapre

सन्त एकनाथ महाराज (अनुवादक: एन. वी. सप्रे) द्वारा

DevanagariHindipublished869 पृष्ठ

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विषयानुक्रमणिका
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अध्याय १ १-१९
मंगलाचरण, परिक्षिती वृत्तांत; श्रीकृष्ण चरित्र की अपूर्वता, भूभार हरण के लिये
यदुकुल नाश का कृष्ण का संकल्प, ब्रह्मश्राप, लौहमूसल की उत्पत्ति, यादव मूसल
का चूर्ण तथा शेष टुकड़े समुद्र में फेंकते हैं, उससे समुद्र में घास उत्पन्न होती है।
शेष टुकड़े से व्याध का बाण बनाना।
अध्याय २ २०-५७
नारद-वसुदेव भेंट एवं वार्ता, संत दर्शन का माहात्म्य, जड़भरत जनक एवं नौ ऋषभ
पुत्रों का संवाद, भागवतधर्म का रहस्य, भगवद्भक्तों के लक्षण, भक्ति की अनन्यता,
नामस्मरण महिमा।
अध्याय ३ ५८-९८
जनक के प्रश्न, माया के लक्षण, तरने के उपाय, नारायण स्वरूप, सद्गुरु लक्षण,
सच्छिष्य लक्षण, परब्रह्म लक्षण, कर्माकर्म विवरण, पूजा विधान, मूर्ति ध्यान, विवरण
आदि।
अध्याय ४ ९९-११२
भागवत अवतार कथा, नारायण आख्यान, नानावतार वर्णन, अभक्त के लक्षण एवं
गति।
अध्याय ५ ११३-१४०
युग के अनुसार भगवतसेवा, नामस्मरण आदि के मार्ग, मद्य, मांस, मैथुन के प्रयोग
सम्बन्धी वेदोक्ति, भागवद्धर्म रहस्य, वसुदेव का भाग्य, निमिजायंत संवाद, पंचाध्यायी
का माहात्म्य।
अध्याय ६ १४१-१६१
श्री कृष्णदर्शनार्थ देवताओं का आगमन, कृष्ण-द्वारका वर्णन, निजधाम गमन के लिये
प्रार्थना, उद्धव का साथ चलने का आग्रह, द्वारका में उत्पात, यादवों का प्रभास जाने
का विचार, प्रभास महात्म्य, श्रीकृष्ण चरित्र महात्म्य।
अध्याय ७ १६२-१९२
श्रीकृष्ण उद्धव संवाद, भगवान का उद्धव को उपदेश, यदु-अवधूत संवाद, अवधूत
के चौबीस गुरु। पृथ्वी, वायु, जल, आकाश, अग्नि, चन्द्र, सूर्य आदि के अनुकरणीय
गुण, कपोत-कपोती कथा।