दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary
महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्रकाशकीय
या देवी सर्व भूतेषु स्मृति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।
जगज्जननी जगदम्बा के अतुल स्नेह से गङ्गा-तट पर इस आश्रम
में पुनः 'दुर्गा-सप्तशती' के प्रवचन की स्वीकृति पूज्य श्री आचार्य जी ने दे
दी । इस स्वीकृति में श्रेय हमारे स्वामी श्री रामानन्द जी तथा सुश्री
कुमारी रमा मिश्रा जी को है । गत वर्षों की तरह प्रवचन रिकार्ड हुआ,
जिसे अथक परिश्रम, उत्साह और बड़े प्रेम से हमारे श्री एस० एस०
त्रिवेदी जी, अवकाश प्राप्त प्रवक्ता, सी०ए०वी० इन्टर कालिज, मेरठ
कैन्ट ने मुद्रण हेतु लिपिबद्ध किया है ।
इस ग्रन्थ में 'दुर्गा-सप्तशती' के प्रत्येक मन्त्र की व्याख्या नहीं है,
और न शाक्त सिद्धांत मात्र का प्रतिपादन है। इसमें पूर्वाचार्यों के ही
भावों को स्पष्ट किया गया है । हमारे शास्त्रों में आध्यात्मिक,
आधिदैविक, आधिभौतिक तीनों अर्थ समाहित होते हैं। यहाँ आचार्य
जी ने मूल ग्रन्थ का आध्यात्मिक स्वरूप, दैनिक जीवन में उसका उपयोग
बतलाया है । विशेष रूप से भक्ति शास्त्र को वैदिक सिद्ध करके और इस
ग्रन्थ को प्रस्थान-त्रयी से तो सम्बद्ध किया ही है विशेषतः भगवद्
गीता के साथ विशेष शैली में तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया है।
जिससे शोधार्थी अध्येता विशेष लाभ उठा सकेंगे ।
स्वामी सत्यानन्द
बाबा रामदास आश्रम
रामधाम मानस मन्दिर
मिरचाई गली
पटना सिटी-२०० ००२
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