दुर्गा सप्तशती / देवी माहात्म्यम् (पारिजात सौरभ सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Durga Saptashati / Devi Mahatmyam with Commentary
महर्षि वेदव्यास / मार्कण्डेय पुराण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंग्रन्थ की साज-सज्जा, मुद्रण की सुन्दरता, तन्त्रों के
ब्लाक और यहाँ तक कि प्रूफों के संशोधन में सहयोग और
उचित स्थलों के संयोजन में प्रेस के प्रबन्धक एवं स्वामी पुनीत
शादमां का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने अपनी अत्यधिक
व्यस्तता वैविध्य बहुमुखी विस्तृतता के होते हुए भी इस कार्य-
सम्पन्नता में अभिरुचि ली। यद्यपि इससे पूर्व में मैं श्री पुनीत
जी से परिचित नहीं था, परिचय का श्रेय श्री वेद प्रकाश जी
(बिजली वाले) महामन्त्री, औघड़नाथ मन्दिर समिति काली
पलटन मेरठ कैन्ट को है जिन्होंने यह प्रकाशित होने के लिए
दी। धर्म के प्रचार-प्रसार में संलग्न, साधु-सन्तों, महात्माओं
के अनन्य प्रेमी भक्त, उत्साही युवक पुनीत जी से प्रकाशन-
विलम्ब के कारण कभी-कभी खीज भी हुई, किन्तु उनकी मन्द
मुसकान और विनम्र स्वभाव में यह सब बालू रेत की भित्ति
बनकर रह गई। अतः उनसे यह आग्रह करते हुए कि समय की
महत्ता को समझते हुये ही धर्मानुष्ठानों में द्विगुणित उत्साह के
साथ भाग लेकर यशस्वी बनें। यही शुभ कामना है। और
यही माँ जगदम्बा से प्रार्थना भी।
इसमें जो है, जैसा है वह सब गुरु चरणों का विद्वच्चरण-
चञ्चरीक प्रसाद और सब त्रुटियाँ मेरी हैं।
एस० एस० त्रिवेदी
ए-३१, शिवाजी कालोनी
मेरठ कैण्ट।
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