सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 1172 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 99

तैसा वह धनुर्धर । दुःखावेगसे जर्जर ।
रथको था जो सुंदर । दिया छोड ॥ ७२ ॥
तथा छोड तीर कमान । करते अश्रुपात नयन ।
राजन् सुनो यह कथन । बोला संजय ॥ ७३ ॥
दूसरे अध्यायकी प्रस्तावना —
इस पर वैकुंठ नाथ । देखके खेद-मूर्ती पार्थ ।
किस भांतिका परमार्थ । कहेगा भला ॥ ७४ ॥
सविस्तर करेगा वर्णन । सकौतुक कहेगा कथन ।
कहेगा ज्ञानदेव वचन । निवृत्तिदास ॥ ७५ ॥
गीता श्लोक ४७
ज्ञानेश्वरी ओवी २४७.
ॐ