ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनिश्चिंत- चिंतारहित. संसारके विषयमें
निश्चिंत, कर्म फलके विषयमें
निश्चिंत, उदासीन.
निष्काम- भोग वासना रहित. अन्य कामना
रहित. फलेच्छा रहित, निरिच्छ.
निःसंग- संगरहित, आसक्ति रहित, प्राप्त
वस्तुके विषयमें स्नेह रहित, तथा
अप्राप्य वस्तुके विषयमें कामना
रहित.
निःसीमागम्य- निःसीम+अगम्य, मर्यादा
रहित, अनंत इसलिये अगम्य.
समझकी सीमामें न आनेवाला.
नीलोत्पल-नील कमल.
नैष्कर्म्य- कर्मसमाप्तिकी अवस्था, अनंत
कर्म करने पर भी न करनेकासा,
रहना, न करनेकासा करना, कर्मके
थकानसे मुक्ति !
प
पगहा-गिरवाँ, पशुके गलेमें बांधा हुवा
लकडीका लंबा टुकडा. पघा,
असहायस्थिति.
पंचक-पांचोंका समुदाय. अर्थ-पंचक, इंद्रिय
पंचक (पांच ज्ञानेंद्रिय पांच
कर्मेंद्रिय) शब्द स्पर्शादि विषय
पंचक, पृथ्वी आप तेजादि
भूतपंचक, आदि.
पंचत्वलीन-मृत्यु.
पंचम-सप्त स्वरोंमेंसे पांचवा स्वर, कोकिलाका
स्वर. चांडाल.
पंचानन-सिंह.
पट-वस्त्र.
पटीं-मूल मराठी ज्ञानेश्वरीके मराठी व्याक-
रणको स्वीकार करके पट शब्दको
ही " पटीं " सप्तमी विभक्ति
बना करके " पटमें " ऐसा अर्थ
लिया गया है.
पण्यांगना-खरीदी गयी स्त्री, वेश्या, दासी.
पद-मोक्षरूप, ब्रह्मपद, अक्षर ब्रह्म, प्राप्तव्य
स्थान, साध्य.
पदपिंडत्व-जीव-शिवत्व-आत्म-परमात्मत्व.
पदबंध-विशिष्ट प्रकारकी शब्दरचना.
पद्मकर-कमलसा हाथ.
पर-वस्तु, ब्रह्म, उस पारका, दूसरी ओरका.
परतत्त्व- परब्रह्म.
परम- अंतिम, श्रेष्ठ, विश्वव्यापक, सर्वांतर्यामी.
परमात्मतत्व- विश्वव्यापक आत्मतत्व.
परमात्मा- सर्वव्यापक, सर्वांतर्यामी, चैतन्य
स्वरूप, विश्ववाला, सर्वात्मक-
सत्ता, तथा देहमें प्रतिबिंबित
अंतरात्मा.
परमेश्वर- सर्वश्रेष्ठ सर्वसत्ताधीश स्वामी.
परा- उस ओरकी. पराकृति श्रेष्ठ-
प्रकृति. परा भक्ति, श्रेष्ठभक्ति
ज्ञानभक्ति.
पराप्रमेयप्रमदाविलासिंया- परावाणीका
विषय जो स्वरूपस्थिति है उस
चिर तरुणीसे विलास करनेवाला.
परिग्रह- व्यर्थ वस्तुओंका संग्रह. परिवार
प्रपंच.
परिणितोपरमॅकप्रिय- परिपक्व वैराग्य-
वंतोंसे प्रेम रखनेवाला.
परिमल- सुगंध.
परिहार- उत्तर, निराकरण.
पवित्र- पुण्यरूप, पावन करनेवाला. जहांके
भाव, संस्कार, स्मरण आदि सभी
पावन हों ऐसा अंतर्बाह्य शुद्ध.
पसायदान-- प्रसाददान.
पांडुरोगकी पुष्टि- पांडुरोग-रक्ताल्पता-में
आनेवाली सूजन.
पाणिग्रहण- हाथ थामना, करग्रहण, विवाह,
अंतिम समय तक साथ देना.
पातालव्याल- पातालका सर्प.
पादज- पैरकी ओरसे जन्मनेवाला,
भाग्यशाली.
पाप- गीतामें अनेक प्रकारके पापोंका
३११ परिशिष्ट ६