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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 1080

(२१) आप (२२) तेज (२३) वायु (२४) आकाश ये पंचमहाभूत। ये सब मिल कर
चोबीस तत्त्व। इससे परे पुरुष। २५।
चौदह इंद्र—ब्रह्माके एक दिनमें चौदह इंद्र बदलते हैं। पुराणोंमें इन चौदह इंद्रोंके
नाम निम्न हैं। (१) यज्ञ (२) रोचन (३) सत्यजित् (४) त्रिशिख (५) विभु (६)
मंत्रद्रुम (७) पुरंदर (८) बलि (९) अद्भुत (१०) भारद्वाज (११) वस्स (१२) वसिष्ठ
(१३) विष्णुवृद्ध (१४) शांडिल्य ।
चौदह भुवन—समग्र ब्रह्मांडमें चौदह भुवन अथवा चौदह लोक हैं ऐसी भारतीय
तत्त्वज्ञोंकी मान्यता है। इन चौदह भुवनोंको सप्त स्वर्ग और सप्त पाताल कहा गया है। सप्त स्वर्ग
पृथ्वीसे ऊपर हैं। (१) भूलोक, (२) भुवर्लोक, (३) स्वर्लोक (४) महर्लोक (५) जनलोक
(६) तपोलोक (७) सत्यलोक ये भूलोकके-पृथ्वीके-ऊपरके हैं तो (१) अतल (२) वितल
(३) सुतल (४) तलातल (५) रसातल (६) महातल (७) पाताल ये सात लोक
भूलोकके नीचेके हैं।
चौदह-मनु—ब्रह्माके एक दिनमें चौदह मनु बदलते हैं। उन चौदह मनुओंका नाम
निम्न प्रकार है। (१) स्वायंभुव (२) स्वारोचिष (३) उत्तममनु (४) तामसमनु (५)
रैवतमनु (६) चाक्षुषमनु (७) वैवस्वतमनु (८) सावर्णिमनु (९) दक्षसावर्णिमनु
(१०) ब्रह्मसावर्णिमनु (११) धर्मसावर्णिमनु (१२) रुद्रसावर्णिमनु (१३) देव सावर्णिमनु
(१४) इंद्रसावर्णिमनु ।
सृष्टिक्रममें जब लोकस्थिति बदलती है, बिगड़ती है तब सामाजिक जीवनके हितकी दृष्टिसे
जो विधिनिषेध बदलने पड़ते हैं, शास्त्र-नियम बताने पड़ते हैं वह कार्य मनु करते हैं। मनु
सुयोग्य शासक होता है। मनुके बनाये गये नियम, शास्त्र, लंबेसमय तक चलते हैं। जब वे
समाज हितके अनुपयुक्त हो जाते हैं तब नया मनु आता है। एक मनुका काल मन्वंतर कहलाता
है। वर्तमान मन्वंतर वैवस्वत मन्वंतर है। वैवस्वत मनुके कहे गये नियम आजका युग-धर्म है।
छैंतीस तत्त्व—जैसे सांख्योंने विश्वके कारणीभूत २५ तत्त्व कहे हैं वैसे गीताके
क्षेत्र क्षेत्रज्ञयोगमें क्षेत्रके ये ३६ तत्त्व कहे हैं।
५ महाभूत, ५ ज्ञानेंद्रिय, ५ कर्मेंद्रिय, ५ ज्ञानेंद्रियोंके विषय, ५ कर्मेंद्रियोंके विषय,
२६ अहंकार, २७ बुद्धि, २८ पराप्रकृति, २९ मन ३० सुख ३१ दुःख, ३२ द्वेष, ३३ संघात,
३४ चेतना, ३५ इच्छा, ३६ धृति ।
शिवागमोंमें—निम्न ३६ तत्त्व कहे हैं—
१ परासंवित् २ चित्तका प्रकाशरूप शिव, ३ चित्तका विमर्शांशरूप शक्ति, ४ सादाख्यतत्त्व,
५ ईश्वर, ६ शुद्धविद्या, ७ माया, ८ कला, ९ काल, १० नियति, ११ राग, १२ विद्या, १३ पुरुष,
१४ त्रिगुणात्मक प्रकृति, १५ बुद्धि, १६ अहंकार, १७ मन, १८-२२ पंच ज्ञानेंद्रिय, २३-२७ पंच
कर्मेंद्रिय, २८-३२ पंच तन्मात्राएं, ३३-३७ पंचमहाभूत.

ज्ञानेश्वरी
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