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सर्वकोश
धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

धनुर्वेद संहिता (महर्षि वसिष्ठ - प्राचीन भारतीय युद्धकला, धनुर्विद्या एवं अस्त्र-शास्त्र सटीक)

Dhanurveda Samhita of Maharshi Vasishtha with Commentary

महर्षि वसिष्ठ (टीकाकार: स्वामी हरिदयालु जी महाराज) द्वारा

DevanagariHindipublished76 पृष्ठ

पृष्ठ 43, कुल 76 में से

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पृष्ठ 43

' or 'श्लीं'? It's 'श्लीं'. 'पशुं हुंफट्'.)

Line 5:
अमुक शत्रूको (हुंफट्) ऐसा दो लाख मंत्र जपकर पीछे पाशुपतास्त्र फेंके
(Note: 'शत्रूको' with 'ू'.)

Line 6:
फिर संहार के लिये (व्यस्त) उलटा जपे, यह पाशुपतास्त्र सब शत्रुओं

Line 7:
का निवारण करने वाला है॥९४-९६॥

Line 8:
वच्मि वायव्यमस्त्रं ते येन नश्यन्ति शत्रवः ।

Line 9:
ॐवायव्यया वायव्यान्थोर्वा यया वा तथा ।
Wait, let's look at 'वायव्यान्थोर्वा' vs 'वायव्यान्त्योर्वा' vs 'वायव्यान्योर्वा':
Look at the character:
'वा' 'य' 'व्या'
Then: 'न्' (half na), then 'थ' with 'ो' and 'र्' on next letter?
Wait, look at the letter:
It has a loop at top left, curving down and up to the right stem: that is a 'थ'!
Wait, does it have a 'य'?
Look at 'र्थ्यां' in 'पुरश्चर्यां' (L22): 'श्च' has loop, 'र्यां' has 'र्'.
Look at 'न्थो': 'न्