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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 80

११७ ] जरावग्गो [ ६९
(अस्थ्नां नगरं कृतं मांसलोहितलेपनम् ।
यत्र जरा च मृत्युश्च मानो म्रक्षश्चावहितः ॥५॥)
अनुवाद—हड्डियोंका (एक) नगर (=गढ़) बनाया गया है, जो मांस
और रक्तसे लेपा गया है; जिसमें जरा, और मृत्यु, अभि-
मान और डाह छिपे हुये हैं।
जेतवन मल्लिका देवी
१५१—जीरन्ति वे राजरथा सुचित्ता
अथो सरीरम्पि जरं उपेति ।
सतं च धम्मो न जरं उपेति
सन्तो ह वे सब्भि पवेदयन्ति ॥६॥
(जीर्यन्ति वै राजरथाः सुचित्रा अथ शरीरमपि जरामुपेति ।
सतां च धर्मो न जरामुपेति सन्तो ह वै सद्भिः प्रवेदयन्ति॥६॥
अनुवाद—सुचित्रित राजरथ भी पुराने हो जाते हैं, और शरीर भी
जराको प्राप्त होता है; (किन्तु) सज्जनोंका धर्म (=गुण)
जराको नहीं प्राप्त-होता, सन्त जन सत्पुरुषोंके बारेमें
ऐसाही कहते हैं ।
जेतवन (लाळ) उदायी (थेर)
१५२—अप्पस्सुतायं पुरिसो बलिवद्दो'व जीरति ।
मंसानि तस्स वड्ढन्ति पञ्ञा तस्स न वड्ढति ॥७॥
(अल्पश्रुतोऽयं पुरुषो बलीवर्द इव जीर्यति ।
मांसानि तस्य बर्द्धन्ते प्रज्ञा तस्य न बर्द्धते ॥७॥)