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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 63

५२ ] धम्मपदं [ ८।१५
अनुवाद—दुष्प्रज्ञ और असमाहितके सौ वर्षके जीनेसे भी प्रज्ञावान्
और ध्यानीका एक दिनका जीवन श्रेष्ठ है।
जेतवन सप्पदास ( थेर )
११२–यो च वस्ससतं जीवे कुसीतो हीनवीरियो ।
एकाहं जीवितं सेय्यो वीरियमारभतो दळ्हं ॥१३॥
( यश्च वर्षशतं जीवेत् कुसीदो हीनवीर्यः ।
एकाहं जीवितं श्रेयो वीर्यमारभतो दृढम् ॥१३॥ )
अनुवाद—आलसी और अनुद्योगीके सौ वर्षके जीवनसे दृढ़ उद्योग
करनेवालेके जीवनका एक दिन श्रेष्ठ है।
जेतवन पटाचारा ( थेरी )
११३–यो च वस्ससतं जीवे अपस्सं उदयव्ययं ।
एकाहं जीवितं सेय्यो पस्सतो उदयव्ययं ॥१४॥
( यश्च वर्षशतं जीवेद् अपश्यन् उदयव्ययम् ।
एकाहं जीवितं श्रेयः पश्यत उदयव्ययम् ॥१४॥ )
अनुवाद—( संसारमें वस्तुओंके ) उत्पत्ति और विनाशका न
ख्यालकरनेके सौ वर्षके जीवनसे, उत्पत्ति और विनाश-
का ख्याल करनेवाले जीवनका एक दिन श्रेष्ठ है।
जेतवन किस गोतमी
११४–यो च वस्ससतं जीवे अपस्सं अमतं पदं ।
एकाहं जीवितं सेय्यो पस्सतो अमतं पदं ॥१५॥