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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 195

१८४ ] धम्मपदं [ २६।३५
जेतवन सुन्दर समुद्र ( थेर )
४१५—यो 'ध कामे पहत्वान अनागारो परिव्वजे ।
कामभवपरिक्खीणं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३३॥
( य इह कामान् प्रहायाऽनागारः परिव्रजेत् ।
कामभवपरिक्षीणं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३३॥ )
अनुवाद—जो यहाँ भोगोको छोड़, बेघर हो प्रव्रजित (=संन्यासी )
हो गया है, जिसके भोग और जन्म नष्ट हो गये, उसे मैं
ब्राह्मण कहता हूँ ।
राजगृह ( वेणुवन ) जटिल ( थेर )
४१६—यो'ध तण्हं पहत्वान अनागारो परिव्वजे ।
तण्हाभवपरिक्खीणं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३४॥
( य इह तृष्णां प्रहायाऽनागारः परिव्रजेत् ।
तृष्णाभवपरिक्षीणं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३४॥ )
अनुवाद—जो यहाँ तृष्णाको छोड़, बेघर बन प्रव्रजित है, जिसकी
तृष्णा और ( पुनर्-)जन्म नष्ट हो गये, उसे मैं ब्राह्मण
कहता हूँ ।
राजगृह ( वेणुवन ) ( भूतपूर्व नट भिक्षु )
४१७-हित्वा मानुसकं योगं दिब्वं योगं उपच्चगा ।
सब्बयोगविसंयुत्तं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३५॥
( हित्वा मानुषकं योगं दिव्यं योगं उपात्यगात् ।
सर्वयोगविसंयुक्तं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३५॥ )