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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 19

८ ] धम्मपदं [ १।१८
श्रावस्ती ( जेतवन ) देवदत्त
१७-इध तप्पति पेच्च तप्पति ,
पापकारी उभयत्थ तप्पति ।
पापं मे कतन्ति तप्पति ,
भीय्यो तप्पति दुग्गतिङ्गतो ॥१७॥
( इह तप्यति प्रेत्य तप्यति पापकारी उभयत्र तप्यति ।
पापं मे कृतमिति तप्यति, भूयस्तप्यति दुर्गतिंगतः ॥१७॥ )
अनुवाद—यहाँ सन्तप्त होता है, मरकर सन्तप्त होता है, पापकारी
दोनों जगह सन्तप्त होता है । "मैंने पाप किया है"—यह
( सोच ) सन्तप्त होता है , दुर्गति को प्राप्त हो और भी
सन्तप्त होता है ।
श्रावस्ती ( जेतवन ) सुमना देवी
१८-इध नन्दति पेच्च नन्दति ,
कतपुञ्ञो उभयत्थ नन्दति ।
पुञ्ञं मे कतन्ति नन्दति ,
भीय्यो नन्दति सुगतिंगतः ॥ १८॥
( इह नन्दति प्रेत्य नन्दति कृतपुण्य उभयत्र नन्दति ।
पुण्यं मे कृतमिति नन्दति, भूयो नन्दति सुगतिंगतः ॥१८॥ )
अनुवाद—यहाँ आनन्दित होता है, मरकर आनन्दित होता है ।
जिसने पुण्य किया है, वह दोनों जगह आनन्दित होता है ।
"मैंने पुण्य किया है"—यह ( सोच ) आनन्दित होता
है ; सुगति को प्राप्त हो और भी आनन्दित होता है ।