धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१।१६ ] यमकवग्गो [ ७
राजगृह ( वेणुवन ) चुन्द ( सूकरिक )
१५-इध सोचति पेच्च सोचति
पापकारी उभयत्थ सोचति ।
सो सोचति सो विहञ्ञति
दिस्वा कम्मकिलिट्ठमत्तनो ॥ १५॥
( इह शोचति प्रेत्य शोचति पापकारी उभयत्र शोचति ।
स शोचति स विहन्यते दृष्ट्वा कर्म क्लिष्टमात्मनः ॥१५॥ )
अनुवाद—यहाँ ( इस लोकमें ) शोक करता है, मरनेके बाद शोक
करता है, पाप करनेवाला दोनों ( लोक ) में शोक करता
है । वह अपने मलिन कर्मोंको देखकर शोक करता है,
पीड़ित होता है ।
श्रावस्ती ( जेतवन ) धम्मिक ( उपासक )
१६-इध मोदति पेच्च मोदति
कतपुञ्ञो उभयत्थ मोदति ।
सो मोदति सो पमोदति
दिस्वा कम्मविसुद्धिमत्तनो ॥१६॥
( इह मोदते प्रेत्य मोदते कृतपुण्य उभयत्र मोदते ।
स मोदते स प्रमोद्ते दृष्ट्वा कर्मविशुद्धिमात्मनः ॥१६॥ )
अनुवाद—यहाँ प्रमुदित होता है, मरनेके बाद प्रमुदित होता है,
जिसने पुण्य किया है, वह दोनों ही जगह प्रमुदित होता,
है । वह अपने कर्मोंकी शुद्धताको देखकर मुदित होता है,
प्रमुदित होता है ।